“सजदा तेरे प्यार में!”
“सजदा तेरे प्यार में”
* तेरा आशिक हूँ मुझे दिल में उतर जाने दो।
केद ही सही तेरे दिल के केदखाने में जी जाने दो ।।
मुजरिम ही रहू मै तेरा मुझे रोज-2
सजा पाने दो।
पतंगा हूँ में अपने फन जुनू में तेरी मुझे जल जाने दो।।
तेरे दिल के केदखाने में क्या दिन क्या रात।
मेरे लिए तो जन्नत ही जन्नत सुकू शब् की बरात।।
अब डर कुछ नहीै मेफुज़ मै ए नाज़नी तेरे तसव्वर मे।
फूलो की महक हैं शबनम का बिछोना।।
मुझे मोंत बक्शे वो खुदा बन जनाजा सज जाने दो।
खुदाई तुम बन हम नवाज इक कब्र में सो जाने दो।।
अब ना उठने की कोई ख्वाइश न जन्नत नशी होने की चाह।
मेरे महबूब तुम ही जन्नत मुझे तुम अपना खुदा बनाने दो।
+ nk सनातन