“सेनिक और शहीदी ज्वार !”
“सेनिक और शहीदी ज्वार !”
( गणतंत्र दिवस के सिरहाने मै भारत वर्ष के जाबाजो को अपने ये मनोभाव समर्पित करता हूँ )
कोई पत्नी पे मरता है ,कोई प्रेयसी पे मरता है
कोई बच्चो पे मरता है ,कोई माँ-बाप पे मरता है
कोई खुद पे ही जीता है,कोई खुद पे ही मरता है
ये रिवाज़ है दुनिया का जो सरे आम दीखता है
मै इक सिपाही सारा देश ही मेरा परिवार
मै सीमा पे लड़ता हूँ सीमा पे मरता हूँ
मेरे माता पिता है न्यारे वतन की सोचने वाले
बिस्मिल अशफाक ही क्यों जन्मे घर हमारे
ये कहकर दुःख अफ़सोस जताने वाले
मै जाबाज़ नही -पालको ने मेरे मुझे जाबाज़ बनाया है
मै लड़ाका नही -धारको ने मेरे दुश्मन के दांत खट्टे करना सिखाया है
नत-मस्तक मै अपने माता-पिता और उनकी सोच पर
उन्होंने जो सांसारिकता रख अटारी सेना में भर्ती कराया है
मै भी भुला प्रेम अपना निज परिवार भी है मेरा
हुवा विरक्त देश की खातिर रिश्ता-नाता भुला मेरा
और तना रहता हूँ देश की खातिर सीमा पर
संगीन हाथो में और नज़र दुश्मन की घात पर
मारू या के मरू जिउ बस देश के खातिर
देश जनो वतन ही मेरा सब कुछ है
मेरे पालको का सपना है और मेरा भी
जरुरत पड़े तो देश के काम आऊ
न्योछावर जान -तन कर ज़ाऊ
लडू काम आऊ मरकर या मरकर शत्रु को
तिरंगा देश की शान हमारी राष्ट्र गान है आन हमारा
तिरंगा हर घडी हर जगह लहराऊ
शहीद होउ तो -2 तिरंगे में लिपटा जाऊ
इक्कीस तोपों की सलामी पा-कर धन्य हो जाऊ
देश के इतिहास में जाबाज़ रण बांकुरा कहलाऊ
शहीदी स्वर्गीय मौत में सुनु राष्ट्र गान की। मधुर लहरी
भारत माँ की इस अमर लोरी से नीद अनोखी पा जाऊ
गौरवशाली ओ मेरे भारतवासी हिन्द वासी
मै इतिहास का अमर पन्ना बन जाऊ
और जब जब भी हो राष्ट्र के नाम
हां वारे न्यारे प्यारे दुलारे जलसे
ओ देश जनों खुद भी झूमू उस अमरलोक में
और तुम्हे भी झुमाऊ देश की प्यारी वीर धुनों में ।
*NK सेवक “सनातन” क्रिएटेड ओन 24 जनवरी,2017