हलाल लम
यादों के झरोखे से…
पिछले साल मीठी ईद के पाक और दिलशाद मौके पर हमारे अजीजतम साथी MK खान साब के निवास के बाहर…!
इक शेर~
जीवन में मीठी ईद गिनती की यानी कम आती है
और बकरी ईद अनगिनत अनायास आती है
*समझे इस शेर को की मैं क्या कहना चाहता हूं
यानी व्यक्ति जीवन में दो जून की रोटी के लिए हजारों बार मेहनत मशक्कत में हलाल होता रहता है
और उस मेहनत से कमा कभी वार त्योहार के अवसर हंस लेता है
*Nk सनातन