बिखरी जुल्फें उलझे ख़याल
विधा: TelemarkAAAA. Field: Philosophy
सुलाता है वो जगाता है वो
लेकिन एक रोज वो उठाता नही
अपने जहां में ले जाता है
यहां सिर्फ मुर्दा रह जाता है
ओर उस रात भुत दावत से गुलज़ार होते हैं
यू तो हम लाश जलाते हैं दफ़नाते है
असल मे वो शरीर उनके नाम होते हैं !
Nk sanatan
खयाल क्या से क्या आने लगे हैं
क्योकि एक के बाद एक लोग
यानी अपने-पराए दुनिया से जाने लगे हैं !
Nk sanatan
तुमने जैसी महोब्बत की शायद ही किसी ने की होगी अपने दिलबर जान से
तुम हमपे कितनी
जानिसार थी सिर्फ हम- तुम जानते हैं
Nk sanatan
तुम्हें हक है हमसे बहुत सी शिकायतें करने का
तुम्हारी इसी अदा को हम जाँनिसार, दिलोजान कहते हैं ।
Nk Sanatan
मेरी कहानी नायिका प्रधान तुम इसकी बहुत खास किरदार हो
किताबे लाख कहे पुरुष प्रधान समाज
असल मे सब मोहतरमा के गुलाम होते हैं !
Nk Sanatan
तुम्हें हमसे लाख शिकायते हैं भला तुम कुछ भी कहो इन्हें हम उपहार समझते हैं! Nk Sanatan
तेरी परेशान करने की आदत में भी कद्रदानी
हम खूब समझते है
परेशानी में मझा इतना कि खुद को खुशगवार समझते हैं !
Nk Sanatan
बुला बुला के ऐ नादान यू परेशान बहुत करती हो
तुम हो इतनी हसीन की ये ज़ुल्म सरेआम करती हो !
Nk Sanatan ●
बुला बुला के दिल ऐ बहार ,गलहार करती हो
दिन में ये हँसी जुल्म कई बार करती हो।