~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

अफसोस आया के आया नहीं होती!

महिला दिवस नोकरी पेशा महिला होना अच्छा है
क्यो क्योकि भोतिक युग है आर्थिक सम्बल मिलता है
ऎश्वर्य बढ़ता है
लेकिन दार्शनिक रूप से क्या ये अच्छा है
शायद नहीं…….
क्यो………
महिला दिवस है और….
ओर सत्य अपच कड़वा है
मगर है तो क्यो क्योकि
प्राकुतिक सिद्धांत देखें
तो ये एक विद्रोह बलवा है
ईश्वरीय व्यवस्था को एक एक धत्ता है
क्योकि बच्चे का ममत्व तरसता है
माँ का ममत्व भी रोता है
ओर बच्चा आया पर पलता है
बिटनी बॉटल पर फ़लता है
या फिर नानी-दादी पर पलता है
लेकिन ये सत्य की माँ माँ है
आया दादी-नानी उसका पर्याय नहीं
इस तरह प्रसव के बाद चाहे सिस्टम देता है
हां मातृत्व अवकाश लेकिन कितना
7 माह 8 माह ओर बस
मनोवैज्ञान,औषधीय विज्ञान , सामाजिक विज्ञान
सब पर गौर करे एक शिशु को
हाँ चाहिए पूरे 5 साल
हां माँ की गोद माँ का आँचल
ओर दैविक स्तन पान
ओर जो न केवल जच्चा वरन बच्चा दोनो
हाँ दोनों के लिए स्वास्थ्यकारी
ओर स्वास्थ्य से बढ़ कर कोई नहीं पूंजी भाई
उसके आगे सब पूंजिया गौण जमानाइ
अतः “सनातन ” निचोड़ अकुलाई
की नारी का प्रथमेव धर्म
जो ईश्वर के सबसे सन्निकट
वो केवल ओर केवल मातृत्व
ओर दूसरा शिशु-बालक का लालन पालन
यानी उम्र 45 तक महिला निबट ले ये धर्म
ओर शिक्षित हो तो मात्र औपचारिक प्रकिया द्वारा
हाँ राज्यकर्मी या किसी भी संस्था की करे अगुवाई
ओर मातृत्व से पहले चाहे वो हो रोजगारी
इससे न होगा शिशु समाज से कोई अन्यायी
भोतिक सम्पनता से जरूरी नेतिक जिम्मेदारी
लेकिन पश्चिम की संस्कृति है अपनाई
ओर माँ-सन्तान में रहती एक खाई
ओर उसकी मानसिकता में भी फिर
हां फिर भोतिक ही अँगड़ाई
बुढ़ापा श्यापा दोनों बुजुर्ग घर पर
बेटा ओर बहु नोकरी
पैसा खूब लेकिन मां-बाप कहे
बेटा-बहु कुछ पल हमारे संग भी बैठो
इन नोकरो से काम तो सब हो जाते
लेकिन लेकिन प्रगाढ़ता अंतरंगता रिश्तों की रिसी-रिसाई
महिला दिवस नारी समाज शिक्षित हो
ओर फिर वो गृहिणी हो तो देखो बच्चों में दैविक संस्कार
पति कहे साईकिल पर जाऊंगा लेकिन
लेकिन नहीं करनी नोकरी करो अपने बच्चों से न्याय
हालांकि देश में कम है कामकाजी महिलाएं
लेकिन ट्रेंड जो चला है हैं विचाराई
मातृत्व इतना बड़ा सरकार भी देती है लम्बा अवकाश
ओर वो भी सवैतनिक
इससे अलग वित्तीय भार
लेकिन आधुनिक युग की यही तर्ज
नारी शक्ति का है ये अधिकार
जयतु महिला जयतु महिला दिवस
महिला सशक्तिकरण का है आह्वान
महिला सशक्तिकरण का सर्व समाज हामी
देश समृद्धि इस पर सब हाँजी
*NK सेवक ” सनातन “