~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

“इक सच थोड़ा ही सही !”

“ईक सच थोडा ही सही पर सही !”
(माँ पर अब तक आपने सकारत्म विषय वस्तु ही पढ़ी है लेकिन भावनाओं से इतर इसका इक पश्च या पार्शव भाग भी है । लहरों के साथ बहना या तेरना अच्छा है लेकिन धाराओं के विपरीत भी कभी चलना चाहिए तो कुछ सच कडवे भी बाहर आते है। मै अपनी कलम से इक ऐसी ही तस्वीर उकेर रहा हूँ जो गिनीज़ बुक माँ कविता अभियान में अकेली रचना होगी हालाकि फिर अनुसरण हो क्योकि भारत के लोग भेड़ चाल के लिए कुख्यात/विख्यात हैं।
मै धाराओं के विपरीत जाने का साहस करता हु। देखे मेरी तकरीर—

माँ तेरी माँ मेरी माँ सबकी अच्छी सच्ची है
लेकिन ऐसा ही है तो ऐसा नही है बात जो कच्ची है
माँ ए सबकी बहुत अच्छी हैं बात सो फीसदी नहीं सच्ची है
महानं शेक्सपियर की कालजयी मेकबेथ हेलमेट पढो
बात सनातन की पाओगे बड़ी नही तो थोड़ी सच्ची है
माये असली भी कुछ मायनों में सोतेली होती हैं
चार हो जब बेटे या बेटी सबके साथ वो न्यायिक नही होती
इक बेटा जो उसके साथ वो सेवा के नाम पक्ष लेती है
सम्पति में वो ज्यादा हिस्सा उसी के नाम पक्ष लेती है
जो बीबी का पक्षधर माँ उसके साथ भी न्याय नही करती
यदि आपने चुन ली बहु खुद ब खुद अपनी पसंद की
माँ बेटे को कोसती है ना पसंद करती रुठती है
माँ माँ होती है लेकिन बक्त के साथ माँ भीं बदलती है
बिन मांगे तो माँ भी बच्चे को दूध नही पिलाती है
ये कहावत यु ही नही किताबो व्यवहारों में बसती है
माँ ए चार बेतिया हो तो भी बराबर नही होती हैं
किसी से बहुत ज्यादा इक प्रतिशत ही कम लेकिन मोहब्ब्त कम होती है
इसलिए “सनातन “को टीस उभरती हैं
माँ यें कुछ् अपवाद क्यों होती हैं
लिखने में कुछ भि लिख ले “सनातन”
लेकिन माँ सब इक समान कहा होती हैं
महिमा माँ की बेशक कम नही होती
माँ कोशल्या माँ कुंती माँ माद्री माँ केकयी होती है
लेकिन माँ वो भी हुई जो बिन राजा के अपने दुसरे पुत्र को राजा घोषित नही करती हैं
हां जिन माँ ओ के सिर्फ इक पुत्र या ले इक पुत्री
खरी उतरती हैं लेकिन पति का होने और बहु का होने
माये अफ़सोस करती हैं की मेने इसे इसीलिए दूध पिलाया
इसका मल-मूत्र धोया और गहरा लाड लड़ाया
रात रात भर यु ही बेकार जाग जाग लाडली लाडले को पाला पोषा
जब संतान बिगडेल तो माये बच्चो को मदर इंडिया बन गोली भी मारती हैं
बस कुछ ऐसी बातो पे “सनातन” की कलम रोती है।
nk सनातन
*नोट– मेरा इरादा माँ की महिमा और स्तुति को कम करना नही
दिवार पिक्चर का जाया
मै खुशकिस्मत की मेरी माँ है।
**N K सेवक “सनातन”

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