~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

ईश्वर दिखता नहीं ,हवा भी कहाँ दिखती है!

ईश्वर दिखता नहीं , हवा भी कहाँ दिखती है!*
ईश्वर दिखता कहाँ, महसूस होता है
कायनात अद्भुत उसका रूप झलकता है
समस्याएं जग की अनेक आईना कहता है
आधुनिकता हावी प्रकुति पर आज कहता है ।

पर्यावरण खतरे में सब कहते, अमल कौन करता है
उपभोगवादी हम सुविधाएं कौन कम करता है
शिक्षा पद्धति ,रीति-नीति सब देशों की एक है
मानवता असल धर्म से परे दानवता एकमेव है।

सब कहते करे दुरस्त पर करे कौन ?
होंडा-होड़ी में सब मग्न बने हैं मौन।

शिक्षा-ज्ञान सब पाप-पुण्यो की जड़ है
विज्ञान से सब मस्त भोतिक सुरों की लड़ है
आइंस्टीन रोते ,न्यूटन ओर सब विज्ञानि जो हैं अस्त
बृहस्पति बहुत कम शुक्राचार्य के आईने से सब ग्रस्त

हम नवाज़े धरती पर उन बिरलों को लेकिन जन्नतमें हैं वो त्रस्त
ईश्वर कोसे उनको वो तानों से पस्त हैं

भोतिक सुख तुमने दिए उपहास मेरा मानव करे अट्टहास
प्राकृतिकता का उल्लंघन करे जग सत्ता का उपहास
हो तुम विज्ञानी सब अपराधी मनुज बना कारण तुम्हारे भोग -विलासी
स्वर्ग सा सुख भुगत रहे हैं सब सारे धरतीवासी

नियत भाग्य रोये चित्रगुप्त खाता गड़बड़ाए
व्यक्ति कोई मरे समय पहले कोई बाद इतराये
मेडिकल साइंस ओर विज्ञानी खलनायक हमारे
सो भेजा सब विज्ञानी नर्क के द्वारे

क्योकि तुमसे हुई दुनिया दानव
लिए भोतिकताये
सनातन ओर सारे धर्म शास्त्र, मिल्टन- मार्लो कालजयी चेताये
पर हे मानव तू कहाँ मांने बिन सबक आजमाए
चले तू करे अपनी धुन चाहे प्रकुति असन्तुल दुत्कारे

दानव को जब वरदान दिए तप के साये
पर उसने दुरुपयोग किया तब मानवता अकुलाये
तब-तब अवतार अवतरित ओर दुष्टता संहारे
वरदान अभिशाप में बदल गए अवतारों के मारे

तुम मानव हो या दानव तय करे अगर महसूस करे जख्म
अब दूषण ही अवतार ,प्रकोप जो हैं समझ के समझ
जाने कब हो नाश दुनिया का कलयुग का कलश
शास्त्रों में सही कहा चौथा युग है कलयुग समझ
संभले हम कहे सब पर शुरुआत हो कब ?
*N.K. सेवक “सनातन “