उम्र की क्रिकेट में शतक… अपवाद
■उम्र के अर्धशतक बाद हर समय डीआरएस (DRS) लेना विवशता! ■
उम्र की क्रिकेट में अर्धशतक बाद व्यक्ति नॉन-स्ट्राइकर छोर पर जहां उसे स्ट्राइकर के लिए चाहे -अनचाहे भागना पड़ता है !
ओर उसके अर्धशतक की तालियां बज़ चुकी है
अब शतक पर बजती है
ओर अफ़्सोस उम्र की क्रिकेट में शतक नहीं ठुकता !
हाँ एक उम्र ऐ दौर के बाद
बस एक ही -2 ख्याल रहता है
वो ये की-2 तबियत या के सेहत
बस दूरस्त हो या के तंदुरुस्त
क्योकि उम्र पचास के बाद बीमारी के नाम
कुछ न कुछ हिस्से आ ही जाता है
सब धन गौण ,तुच्छ तब बस अच्छा स्वास्थ्य ही खास ध्येय बन जाता है
अच्छा स्वास्थ्य है उम्र ऐ उस दौर में
तो धन का सदुपयोग किया जा सकता हैं
ओर धन का ज्यादा महत्व नही रह जाता है
अच्छा स्वास्थ्य ही असल पूंजी बन जाता है
तब जब स्वास्थ्य आपका दोस्त बन जाता है
यदि अस्वस्थ या रूग्ण है किसी कुछ बीमारी से
तो आधुनिक मेडिकल साइंस का युग
इलाज सब मिल जाता है
लेकिन धन बहुत जरूरी
धन से ही इलाज होता है
लेकिन आदमी मर- मर के जीता है
वापस वो चंगा स्वास्थ्य पा जाए मुश्किल होता है
उम्र ओर इलाज दोनो वजह से वो डेंजर जॉन में होता है
फिर समय और साथ -हाथ भी जरूरी
यानी आपके साथ आपके अपने भी जरूरी
चाहे कितनी ही सुविधा संपन्न अस्पताल हो !
फिर इलाज सूट हो जाय ऐसी किस्मत भी जरूरी
यानी धन खर्च कर इलाज हो सकता है
लेकिन स्वास्थ्य वो पा
जाये पहले जैसा था
मुश्किल होता हैं
उम्र का उमरी पड़ाव ही ऐसा
की की ऊपर नीचे तो स्वास्थ्य का चलना ही है
फिर खाने में पसंद नही चलती
आदमी आधा तो वही मर जाता है
बस कदम कदम पर स्वास्थ्य से समझौता
बस यही -2
मुखड़ा दुखड़ा अंतरा रह जाता है !
*nk सनातन