ओ दुनिया के रखवाले!
**ओ दुनिया के रखवाले**
(बॉलीवूड के प्रारंभिक दौर के ख्यात अभिनेता भारत भूषण के संदर्भ में जब आज उन्हें कोई पहचानता नही)
******वक्त वक्त की बात******
अभी कुछ समय पूर्व मैने एक आर्टिकल के द्वारा जाना कि अपने दौर के मशहूर बॉलीवुड फ़िल्म स्टार
Bhaaarat
Bhushaaaaaaaan
जिन्होंने बॉलीवुड और उस दौर के चलचित्र प्रसंशकों -चाहको को कई नायब फिल्मों के द्वारा जबरदस्त ख़ुशी-मनोरंजन दिया
जिनमे उनकी
ब्लॉकबस्टर-” बैजू बावरा”
जिसमे ट्रेजेडी क्वीन नाम से प्रसिद्ध मीना कुमारी जी
अभिनेत्री थी
ओर उस फिल्म के गीतों ने धूम मचा दी थी
ओर सदाबहार गीतों में उनके गीत संवेदनशील फैंस ओर बुद्धिजीवी वर्ग आज भी डूब के सुनता है…….!
लेकिन वही अभिनेता जब मुंबई की लाइफ लाइन ओर धड़कन
Local
Railways
में कही जाने के लिए कतार में हैं या भीड़ में
अफसोस उन्हें अब कोई नही पहचानता
इसलिये की आज वो वृद्ध हो चले हैं वो खूबसूरत चेहरा नही रहा और इसलिये वो पहचान भी नही
ओर हर कोई
अमिताभ बच्चन साब की तरह भाग्यशाली ओर ऊर्जावान नही
की 74 की उम्र तक भी अपनी सितारा हैसियत कायम रखे हैं
ओर शिखर पर हैं और मीडिया उन्हें Big B के नाम नवाज़ता है
बॉलीवुड का शहंशाह ओर डॉन
के नाम से इज्जत देता है
ओर फिर उनकी जीवन संगिनी भी मशहूर अदाकारा रही और हैं और राजनीति में उनकी पैठ ओर राज्यसभा की वो मेम्बरान यानी सांसद और उनके सुपुत्र भी फ़िल्म स्टार ओर उनकी विश्व सुंदरी बहु ओर बॉलीवुड की श्रेष्ठ अभिनेत्री ओर लक्ष्मी जी भी महरबान ओर वित्तीय संकट से उबर वापस स्थापित ओर अब बड़ा बैंक बेलेंस ओर यही आपकी ख्याति का असली मापन
सो सारे ग्रह आपके साथ जो तारामंडल अब भी शोभित ओर देदीप्यमान
लेकिन भारत भूषण साब के सम्बंध में ये सब नही । सुना कि उन्हें अपने ही खून यानी सगे भाई ने वित्तीय धोखा दिया….!
अतः आज उस भीड़ में उन्हें पहचानने वाला कोई नही
क्यो पहचानेगॉ कोई भाई
क्योकि आप लोकल ट्रेन में यात्रा कर रहे हैं तो जाहिर आप आम आदमी
ओर आम आदमी को कहीं कोई कहा पहचान ता है!!!
हां भारत भूषण साब
रोल्स रॉयल या मरसिडिस या ऑडी बेशकीमती कार में होते उनके साथ आगे पीछे सेल्फ सेक्यूरिटी होती बाउंसर होते
क़ीमती कपड़ो में होते
शानदार महंगे बेंगलो में होते
लेकिन वो अभिनेता जो अब उम्रदराज ओर आउट ऑफ एक्शन है
जिसे पहचानने वाले भी उम्रदराज हो चुके हैं और कम हो गए है उनके चश्मों के नम्बर बढ़ गए हैं और
नए चश्मो के लिए बेटो पर निर्भर हैं और बेटे आज के इतने समझदार हैं कि उस पिता के माता के चश्मे बनाना जरूरी नही समझते…..!
खेर
ये सब वक्त निर्मम वक्त का चलन है खेल हैं
कल जो दिल मे रहते थे दीवार पर धूल खाने और सदाबहार काष्ठ की माला पहन हमेशा हमेशा के लिए हँसते हुवे छोड़ दिये हैं!!!!
वक्त के साये बड़े बेदर्द ओर भयानक होते हैं
अतः सूरज का चमकता बहुत आवश्यक है
खोए सूरज का कोई वजूद नही।
*N K सेवक “सनातन”