क्रांति का रंग बसंती
28 सितम्बर भगत सिंह जयंती मेरे जज्ब
शहीद ऐ आजम
तुझे शत शत नमन
तू हिंद की शान
तुझसे देश की आन
देश की खातिर
मरना और मारना
सीखे हर नौजवान !
मौत कौन चुनता है
वो भी भर जवानी में
लेकिन भगत सरदार बन
चुनता है तमगा ये सरे बाजार ले
जी हां पूरे होशो हवास
सरदार या के मुखिया
हां चुनिंदा जब क्रांतिवीरों का
भेजता है पैगाम
जब स्वयं हुवे गिरफ्तार
चाहते तो भाग सकते सरे आम
लेकिन कैद चुनी
मगर सुना आ रहा शेरो का शेर
की आ रहा मुखिया आजाद अपनी टोली
छुड़ाने भारत भाल
बड़े विनीत कहते वाहक
नही नही
मैं फांसी चढ़ना चाहता हूं
मैं मौत कुछ नही है मामूली
देश हित बताना चाहता हूं
मै हर देश जवान को जगाना चाहता हूं
मैं संघठन में ऐसे रण बांकुरे भरना चाहता हूं
मौत मरी जाए पर बहादुरों की
देश आजादी को उठे बड़ी भारी फोज
मार तो मैं भी सकता था
सो पच्चास फिरंगियों को
भाग भी सकता था साथी सुखदेव, राजगुरु को ले
लेकिन नहीं मैने बम गिराया
सिर्फ बहरो को हमारी आह
हमारी आवाज सुनाने
देश आजादी हमारा हक
करो इसे आजाद
इसके लिए निकले चाहे दम
इस हेतु हम किसी भी कीमत
है तैयार है तैयार
और वो शुर चढ़ा फांसी हंसते, गाते साथी उसके जाबाज
सुर में सुर मिलाते
मेरा रंग दे बसंती चोला गाते
खोफजदा कायर रंगरेज
वैसे नाम से वो अंग्रेज
चढ़ा देते उन देश के
जज्ब वीरों को फांसी
लेकिन तय जगह से दूसरी दूरी
नमन उस महान वीर सपूत को
रहेगा शान देश की निरंतर
अपनी क्रांतिकारी आवाज ले कर
अपनी महान कुर्बानी ले
और अपने समता और समानता के विचारो को लेकर !
*Nk सनातन
