जय जवान-जय किसान
जय जवान
जय किसान
जवान देश की रीढ़ है
तो किसान देश का हित
जवान जब देश हित मे शहिद होता है तो 21 तोपो की सलामी दी जाती है और बदन तिरंगे में लिपटाया जाता है….. तो “सनातन नरेश” की चाह है कि यही सम्मान देश की रीत, देश का हित, देश का मित, देश का जीत ,देश का प्रिंत , देश का अमित
किसान
हाँ जी हाँ किसान जब भी इस दुनिया से प्राकृतिक,भौतिक रूप से इस दुनिया से अलविदा कहे तो उसे शहीद का दर्जा दिया जाय और वही सम्मान दिया जाय जो एक जवान को दिया जाता है
( लेकिन इसमें शर्त ये है कि वह व्यक्ति कम से कम स्नातक स्तर तक शिक्षित हो और पैतृक रूप से जमीन हो यानी उसे सरकार जमीन उपलब्ध कराए ( लीज पर किराया रूप 40 वर्षो तक लगातार खुद किसान रह खेती की हो और खेती-बाड़ी के लिए समर्पित रहा हो ओर वार्षिक रूप से तय अनाज का उत्पादन भी जरूरी हो यानी शहीद जैसे कड़े मापदंड ,जिसका बाकायदा रजिस्ट्रेशन या इंद्राज राजकीय रूप से हो।
(ऐसे वैसे राजनेताओ को ये सम्मान दिया जाता है तो किसान जैसी महातपस्वी शख्सियत को ये सम्मान दिया जाय तो क्या हर्ज है… दोस्तो, देश जनो क्या कहते हैं मेरे इस दैविक विचार के बारे में.. शायद ही कोई हो जो मेरे इस विचार से इत्तफाक या सहमति न जताए)
जय किसान जय भारत
जय जवान जय भारत!
*NK सेवक “सनातन”