~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

पुलिंदा खयाल ऐ खबर

पुलिंदा खयाल ऐ खबर

शिक्षा एक व्यवसाय नहीं है ये इक सेवा सेवा है हालांकि आधुनिक युग में शिक्षा के उद्देश्य बदले हैं और शिक्षा का स्तर नैतिक एवम प्राकृतिक न होकर पूर्णरूपेण व्यावाइक एवम भौतिक दायरे में चला गया है। शिक्षा का मूल उद्देश्य व्यक्ति को सुनागरिक और नैतिक रूप से सामाजिक प्राणी बनाना है लेकिन आज सामाजिक रूप से अभिभावक एवम शिक्षकों द्वारा शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ नौकरी हांसिल करना हो गया है । आज के अद्यतन दौर में व्यक्ति सिर्फ नौकरी प्राप्त करने के जुगाड में रहता है और अच्छी वेतन श्रृंखला द्वारा सामाजिक एवम भौतिक हैसियत या के ओकात या शुद्ध हिंदी में स्टेटस() बढ़ाने की चाह में लगा रहता है । जबसे सातवां वेतन आयोग सिस्टम यानी व्यवस्था में आया है अधिकांश नौजवानों की पहली पसंद राजकीय महकमे में जाना है क्योंकि वेतन श्रृंखला अच्छी है साथ ही स्थायित्व और अन्य राजकीय लाभ फिर काम का कम बोझ एवम कार्य समय छः घंटे से 8 घंटे और सबसे बढ़िया राजकीय अवकाश सवेतनिक उपभोग ! मल्टीनेशनल कंपनियों में हाई पैकेज वाली नौकरी है लेकिन कार्य समय 12 से 16 घंटे और वह एम्प्लॉई मशीन या रोबोट है और उसकी सामाजिक,पारिवारिक जिंदगी,निजी जीवन सिफर यानी शून्य है ।आज शिक्षा का विस्फोट है क्योंकि शिक्षा सहज और सरल हो गई है और इसके प्राप्त करने के अवसर भी समान होकर बढ़ गए है । हालाकि सहज शिक्षा शेली से गुणात्मक रूप से स्तर गिरा है। हां इससे ग्रेजुएट या स्नातक बढ़े हैं और बेराजगार भी । इसमें जनसंख्या का विस्फोट यानी जनसंख्या बेतहाशा बढ़ी है और इससे आर्थिक संतुलन चरमराया है गड़बड़ाया है और प्रतिस्पर्था बढ़ी है जिससे एक अनार सो बीमार वाली कहावत बलवती हुई है । हां सरकार ने वोकेशनल शिक्षा यानी कार्यकुशलता प्रदान करने वाली बुनियादी व्यवसाईक शिक्षा जिससे छोटे स्तर पर सार्वजनिक स्तर पर जन सुविधा के कुशल कर्मी जैसे इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर,कार्पेंटर,टेलर, बाइंडर,वाशरमेंन या ड्राइक्लाइन , पेंटर ,कुक आदि निजी पेशे से तुरंत रोजगार प्राप्त कर सकते है । देश में स्थापित ब्रिटिश शिक्षाविद मैकाले साब की शिक्षा पद्धति में भारतीय शिक्षा का समावेश कर प्रभावी शिक्षा लागू हो जो सभी के लिए कक्षा 12 वी तक पूर्ण रूप से मुफ्त हो और महाविद्यालय स्तर पर स्नातक एवम अधिस्नातक स्तर की शिक्षा भी मुक्त हो लेकिन उसमे एक निश्चित प्रतिशत लाना तय हो। मैं देश में शिक्षा क्षेत्र में दो तरह के परिवार को चिन्हित करना चाहूंगा वो ये की नौकरी के लिए प्रतिस्पर्धा या कम्पीटिशन खुले मैंदान में हो और छात्रों की उत्तरपुस्तिका सार्वजनिक रूप से वोटो की गिनती की तरह सरेआम जांच हो और हाथो हाथ परिणाम घोषित हो जिससे नकल वगेरह हथकंडों पर नकेल स्वतः कसी जाए और भ्रष्ट तंत्र पर भी लगाम लग जाए। दूसरा अहम बिंदु लिखित परीक्षा के बाद साक्षात्कार सरे आम हो जिसके अंतर्गत प्रश्नकर्ता के प्रश्न और उम्मीदवार के उत्तर सार्वजनिक रूप से सुने जा सके हालाकि उसका कोई दायरा नहीं हो लेकिन सबको समान रूप से यानी इक ही स्तर के प्रश्न पूछे जाए और साक्षात देने वाला व्यक्ति भी साक्षतकर्ता से दस या बीस प्रश्न पूछे की वह भी कितने पानी में है ! मैने शिक्षा को मुक्त करने की बात की जिसमे नौकरी और व्यवसाय करने वाले व्यक्ति की आमदनी,तनख्वाह से इक निश्चित राशि हर माह काट कर उस पर किए खर्चे को वसूला जाया। इक और बिंदु इंगित करूंगा की शिक्षा को भी निजी हाथों में दे कर उन संस्थाओं को सौ फीसद एड या मदद कर शिक्षा को उच्च स्तर प्रदान किया जा सकता है। नौकरी में स्थायित्व खतरनाक है जिससे कार्मिक निश्चित और लापरवाह, उसका वेतन भी स्थाई न हो और काम और नियमित अपडेट नॉलेज की परीक्षा उसकी हो और उसका वेतन अधिक हो और सेवा अवधी 15 साल जिससे बेरोजगारी की समस्या पर अंकुश लग सकेगा। हर अधि स्नातक या पीजी होल्डर व्यक्ति को दो साल तक समाज सेवा अपने राज्य नही बल्कि दूसरे राज्य में देना अनिवार्य हो जिसमे उसे केवल राजकीय भत्ता मिले आवास मिले ।
छात्रों के लिए अकादमिक सत्र सिर्फ दस माह हो जिसमे शुरू के पांच माह अकादमिक और बाद के पांच माह नैतिक,सांस्कृतिक,खेलकूद,मनोरंजन वाले हो !
*Nk सेवक “सनातन”

*खेल इक खेल*

खेल इक ऐसा क्षेत्र है जिसमे जितने पर तो निर्धारित पैसा मिलता है लेकिन हारने पर भी निर्धारित राशि मिलती है
खेल के कुछ अवसरो या इवेंट्स में जितने पर एक्स्ट्रा या बोनस मिलता है और हार में थोड़ा कम धन मिलता है!
*Nk सनातन
[06/09, 07:10] N K Sevak: ईश्वर को पाने का प्रयास,मोक्ष पाने का प्रयास स्वार्थ की उत्कृष्ट श्रेणी में ही आता है इसे अच्छा कहने का आंकलन,मूल्याकन दानवीय गणित है
*Nk सनातन
[06/09, 09:06] N K Sevak: बस यू ही खयाल ऐ इश्क
जीना क्या है…???
नौकरी ,पेशा नहीं …नही !
तो फिर क्या है….?!
ये है …हां नौकरी ,पेशा पेट पालने की विवशता है… लेकिन इस उद्धम से कमाए धन को~” खुशी के लिए, खुशी से खर्च करना …जीना है !!!!!!
*तो फिर मरना क्या है…?!
जी हां~” नौकरी ,पेशे, व्यवसाय से अर्जित धन को, अपने लिए कम औरों के लिए,दूसरो के लिए या जन,प्रकृति,प्राणी कल्याण के लिए मुक्त मन या तहे दिल से निस्वार्थ रूप से खर्च करना ~”मरना है जो वास्तव में जीना है !”
*NK सनातन
लेखनी नश्वर है लेकिन वाणी जो आसमा या ब्रह्माण्ड में बिखर घुली है व्याप्त है और परोक्ष रूप से अमर है और विज्ञान के सूक्ष्म तंत्र उस ध्वनि को पुनः संचरित या संग्रहित या कलेक्ट करने में समर्थ है ,जर्मनी में ये प्रयास किए गए है जो आंशिक रूप से सफल रहे है और इस विषय क्रम में शोध जारी है !
*Nk सनातन
[प्रेम में अपूर्णता या अधूरप्रेम अमरता का पर्याय
देखेराधा~मोहन ,मीरा~
मोहन
क्योंकि पूर्णता के प्रेम पुंज रुक्मणि,अश्वभामा,
जामवंती शर्माए इर्षाय
*Nk सनातन