“बूथ में तूने ढूंढा तेरे ही पैमाने में “
“बूथ में तूने ढूंढा अपने ही पैमाने ”
तू कहता है बूथ बोलती नही ,तू कहता है बूथ कुछ करती नही
तू कहता बूथ भोग खाती नही ,खुद खुद की रक्षा नही करती
चूहे उस पर दोड़े दयानंद मूलचन्द थे तक शिवरात्री पर कोसे
केदार में बादल फटे शिव की बिच गंगा मूरत बाढ़ में बहे
आप कहे वो सर्वशक्तिमान तो खुद की रक्षा क्यों न करे
लेकिन नादां वो भी ऐसा करे जैसा तू साधारण की तरह कहे
तो उसमे और तुजमे फर्क क्या वो आखिर तू नही वो है वो
लेकिन तू हर चीज़ तर्क में तोले प्रयोग में जांचे परखे
सो निश्चित तेरा तर्क सही है तरते यापन और मापन में
लेकिन इसमें मेरा क्या कसूर तू तेरे ही दायरे में तोले
तूने ही ढूंढा मुझे प्रस्तरो में आखिर क्यों
खुद हो श्लोक मंत्र तंत्र बनाए पोंगा हो पाखंड रचाए
खुद ही घड़े और अपने ही रूप सजाये जानवर में बसाए
खुद ही मंत्र बोले तेल घी के हवन यज्ञ करे
और पत्थरो की। मूरत में प्राण प्रतिष्ठा करे
और बो मूरत पूजित हो भगवान् कहलाये
काश की मानव तूने मुझे -2 अपने ह्रदय ढूंढा होता
काश की तूने मुझे अपने कृत्यों कार्यॊ कर्मो में ढूंढा होता
फिर ये धर्म और धर्म के नाम चोचलो होते
सब धर्म करते दावा अवतार साधू पैगम्बर मसीहा
सब झूठ सब कोरी निरी कल्पना
मै आज तक किसी को दिखा नही
ना ही मेने कोई उपदेश किसी को दिया
ना ही कोई ग्रन्ध लिखा बोला
सब किवादंतियो का रेला मेला खेला
कुछ खुद ही के चमत्कारों से भुनाया
कालांतरण और कालातीत जूठ सजाया
कल का गरीब साईं देखते ही भी भगवान बनाया
अगर आप सच्चे है अनुयायी उनके
कहो सरे आम की चमत्कार पहले हुवे
वो धर्म पुरुष आज करके दिखाए
गर नही -2 तो ये सारे धर्म मिटा दो
मै खुद प्रसंशा मै खुद इबादत पूजा
हे नादाँ हे तुच्छ मगर शाणा -चालाक
तू क्यों मुझे स्तुतियो में बखाने
तू निरा स्वार्थी सिर्फ पाने को भजे
नही दू और और हूँ अब तक रहस्य
इसलिए तू डर के भजे ।।
**nk सनातन