भरम ऐ दोस्ती सब कुछ खुदाया तो नहीं!
भरम ऐ दोस्ती सब कुछ खुदाया तो नहीँ !
कौन कहता है कि दोस्त हर मर्ज की दवा होते हैं
जरा हमसे पूछते की वाकई हकीकत क्या है
दोस्त दवा भी देते हैं और दर्द भी
बस वक्त-बेवक्त की सांसारी बात है
माना दोस्ती खुदा का सबसे अज़ीम तोहफा
लेकिन कड़वे वक्त की बिसात पर जो ठहर जाएं सच्चे
ऐसे दुनिया मे कितने हैं और जो भी हैं इक्के-दुक्के हैं।
मिसाल ऐ दोस्ती कृष्ण-सुदामा कसीदे पढ़े जाते हैं
सनातन पूछते की कृष्ण ख़ुद आते सुदामा के पास
खुद बेचारे गए लगी चोट उस गरीब की खुद्दारी पर
क्या ये ठीक है अजीज दोस्ती के लिए।
पैर धोना तो महज प्रायश्चित था श्री कृष्ण का
ओर बिन मांगे ही सब कुछ दे देना मान दोस्त और उसकी खुद्दारी का
ज़मीर कहां माना था विप्र सुदामा का
जब धकेला हां ढकेला था जब स्व भार्या ने दे ताने पर ताने
दोस्ती के नाम उस दोस्त को दोस्ती के नाम द्वारिका।
*NK सेवक “सनातन”