~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

“मै भारतीय हूँ….यही मेरी पहचान”

“मै भारतीय हूँ”

रेल यात्रा में था पास में इक मुसाफिर और था
सफ़र था समय काटना था जो बातचीत का कोतुक था
पूछा हिचकिचाते हुवे भाई साब कहा जायेंगे
उन्होंने जवाब दिया और बदले में मुझे भी वही पूछा
फिर नाम पुछा रयान बताया मेने मजहब पूछा
उसने इस्लाम बताया जाती मुस्लिम
फिर वो अरब की यात्रा रियाद पहुचा
किसी ने पूछा कहा से जनाब
उसने हिन्दुस्ता बताया जाती हिन्दी मुस्लिम
मजहब हिन्दू इस्लाम यानि सूफी फ़रश्त
इससे उनका कोतुक जागा
उसने साफ़ किया सूफीवाद
जिससे रसखान खुसरो मीर ग़ालिब की दाद
जिसमे 5 बार नवाज़ जरुरी नही
जहां ग़ालिब पूछते जाहिद शराब पिने दे
मस्जिद में बेठ कर या वो जगा बता
जहा खुदा ना हो
बस अल्लाह की इबादत हो
देखे चलचित्र या फिल्म लेला मजनू
जहा बूथ नही मगर कब्रे नवाजी जाती हैं
सजदे किये जाते सर झुकाये जाते हैं
धुप अगरबत्ती दीपक जलाए जाते हैं
कव्वालियो में नाचा झुमा जाता है
नोटों को उड़ाया वारा जाता है
रस्मो रिवाजों में सनातन परंपरा है

तब बो अमेरिका पहुचता है
और देखे अमेरिका में केसे सुर बदलता है
अपनी पहचान अनायास निकलती है
वहां उसे पूछा गया कहा से-भारत
जाती – भारतीय उसने देश भारत बताया
धर्म हिन्दू इस्लाम खुसरो चिस्ती ओलिया का रचा बताया
यहाँ सारी जाती धर्म खुद ब खुद हवा हो जाती है
राष्ट्रीयता विदेश में यु अपने आप जाग जाती है।
nk सनातन

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