राजनेताओ की स्टेचू ओर अमरत्व !
● मेरा बूथ बनवाना भी तेरा एक राजनीतिक व्यापार था ●
मेरे महान कार्यो को नवाज़ा इस कदर की मुझे बूथ बना के बैठा दिया
ये कारस्तानी थी कुछ चापलूसों की की नाम भुनाने मेरा सत्ता के गलियारे में मुझे बूथ बना बैठा दिया
मैं करता भी क्या जिंदा रहते तो हिम्मत न हुई
मरते ही मेले लगया ओर काम तमाम कर दिया।
मूर्ति लगाने में करोड़ों खर्च हुवे जाने किसने कितने खाये
इस तरह उनके तो पो बारह दोहरे फ़ायदे
लेकिन उंगली उठाये कौन क्योकि मेरे नाम उन्होंने काम एक नेक महान कर दिया
ओर फायदा देखे मुझे स्थापित कर एक बूथ में
वो ज्यादा स्थापित हो गए जनाब वो सब अच्छे भले नेता हो गए
मेरे बूथ का क्या बुरा हश्र साल में दो दिन आये
जिसमें बूथ को सजे सजाएं
एक जयंती एक पुण्यतिथि
हाँ फूल अगरबत्ती जलाएं
लेकिन औपचारिकता वहां भी
नाम मगर पूरा भुने भुनवाये
वर्ष भर खुले मौसम में
सर्दी गर्मी वर्षा सहु
साल भर मिट्टी गर्द फिर पक्षियों की लीद पीठ
रंग मूर्ति का बदल गया
आयोजको को बस इसी का इंतज़ार था
फिर बजट पास रंग रोदन इन्नोवेशन ओर करप्शन का कारोबार
*लेकिन मेरा मन कहता काश मेडम तुषाद ने अपनी लेब में सजाया होता
तब लोग सिर्फ देखने को ही निहारने आते
उन्हें जो राह से गुजरना रोज़-रोज जबर्दस्ती देखने को देखना न पड़ता
*NK सेवक “सनातन”