~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

‘सनातन’के पके-अधपके सनातनी शेर

● जहाँ में किस -किस को इब्लीस ( शैतान ) कहुँ -2
खुद को भी देखा तो वो ही वो नज़र आया
*NK सेवक “सनातन “
◆ मेरे शौक से भूंगड़े खाने की चर्चा जमानेवाले मेरी भुखमरी से करते हैं
उनके ( रईस ) एक रोज़ भूख से भूंगड़े खाने की हक़ीक़त थी लेकिन महज शौख समझा
*nk सनातन
● कांच था देखा आरपार का मंझर नज़र आया
शीशा-पारा चढ़ाया पीछे उसके तो फिर चेहरा नज़र आया
*nk सनातन
◆ दर्दो गम या रन्ज ओ गम से लबरेज तो आप भी हैं
लेकिन हम हैं की सब कुछ बया कर देते हैं
*nk सनातन
● जनाब जो जहन में है बयां कर दीजिए
बयां करने का फलसफा अच्छा है इससे मन हल्का होता है
*nk सनातन
◆ देश – देश , शहर दर शहर ,गोशा-गोशा
कहर कोरोना का बढ़ रहा है
फ़िलहाल तो लग रहा मेडीकल विज्ञान असहाय अदना होकर ईश्वरीय प्रकोप से लड़ रहा
*nk सनातन
◆ प्लेग , मलेरिया , टीबी ,पालियों ओर कुछ हद तक केन्सरो पर विजय पाई है
ये विज्ञान ओर मेडिकल विज्ञान है
जिसने ईश्वरीय उपलब्धियां पाई है
यकायक कोरोना वायरस ने कहर ढाया है
दिन-रात शोध ,परीक्षण चल रहा है
थोड़ा इंतज़ार करें शीघ्र कोरोना में ” रो ” हट सिर्फ कोना होना है
*nk सनातन
● संसार मे सभी के भाग्य -दुर्भाग्य एक दूजे से जुड़े होते हैं
कहाँ चीन , कहाँ इटली हम भी चपेट में आ रहे हैं
*nk सनातन