~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

स्वतंत्रता का ज्वार !

*स्वतंत्रता का ज्वार*
{*स्व रचित सर्वाधिकार सुरक्षित *}

जब तारीख 15 अगस्त की आती है ,
मन आंगन में तरंग छेड़ जाती है !!
आजाद है हम खुशियां जहान
इक अखंड हम भारतदेवा,
भावना दिल गहराती है !!
बढ़े चले हम कदम मिलाते ,
आसमा रंग बिखराती है ।
हम देश जनों का ये गौरव पथ ,
गाथा वो अजब उमड़ आती है !
आज का दिन अमर है थाती ,
रहे अक्षूण हम भारत वासी ~2
खुद ब खुद अपने आप ही ,
कमर कस जाती है !!
कोई देखे बुरी नजर हमरे वतन,
हटगिज गवारा नहीं ,
भोहे हम सब की तन जाती है !!
दुश्मन को सबक सिखा,
सीमाऐ लहर लहर मुस्काती हैं!!
तिरंगा जब फहरता है,
टैगोर साज जब गूंजता है!!
विश्व भारती छा जाती है,
भारत धरा के जयकारे ,
सुभाष भगत आजाद के न्यारे !!
तिलक,गांधी ,गोखले ,
राज गुरु सुखदेव उधम,
मंगल अशफाक,
रामखुदी मतवाले,
संघर्ष देश बलिदान की,
रीत अमिट भर जाती है !!
देखता हूं जहां तहां चारो तरफ ,
आसमा है भारत ,हम आजाद परिंदे !!
मन स्फुरित्त, तन संचरित, आभा उमंग
दिख जाती है !!

लाल किले से मुखरित सारे ,
विधान मंडल के रज रखवाले,
हर शाला और दर दफ्तर,
खुशियों की लहर चल जाती है!!
देखते ही देखते खुशियां जहान चढ़ जाती हैं !!
हां जब तारीख 15 अगस्त की आती है,
ये बहुत कुछ सिखला जाती है !!

इक है हम भारतवासी,
हिंदुस्ता कहते मीर इकबाल सिकंदर,
हिंदी है हम, हिंद गुलिस्ता
है ,ये धरती वतन शूरा,
आत्मा धन्य ,तरो ताजा हो आती है !!
गीत हमारा गान हमारा,
वंदे भारत ,भाग्य विधाता,
तिरंगा ऊंचा ,फहर फहरा, शान जगा जाती है!!
तारीख जब 15 अगस्त की आती है,
मन मुदित शोभित कर जाती है !!
इकता का पाठ पढ़ाती,
महंगे बलिदानों को ,
याद कराती,
धड़कन धड़कन बलिहारी, हो जाती है !!
आजाद हम ,आजादी बहुत कीमती,
पाई हमने ,कई बलि वेदी पर,
हरदम रखेंगे ,मर मिटेंगे,
भूल जो ,हम राज रजवाड़ों ने की !!
कभी ना अब हम करेंगे,
भाई चारा, विश्व शांति,
स्वर्णिम भारत !!
आजाद हमेशा ,अविचल हम रहेंगे,
दुश्मन को दोस्त बनाएंगे,
जहर से नही, गुड से मारेंगे !
खुद को खुद से, उन्हे लजाएंगे
हम अमर शांति के, दूत पुरातन
वसुधेव कुटुंबकम, हमारा परम वेद वाक्यम्न,
धरती ये चमन, नीर तरुवर ,
फल फूल लहराएंगे,
पंछी हम भारताकाश के,
हर दम चह चहाएंगे,
गीत कोयल से गायेंगे,
सबको अपना बनायेगे,
तारीख 15 अगस्त की आती है,
खुशियां संग छा जाती हैं,
हम है सच्चे ,अच्छे भारतवासी,
लोहा जगत मनवायेंगे,
गर्वित हम ,संगठित हम,
देश हित ,आगे आएंगे,
सारा विश्व हो भारतीयम, हम ऐसी फिज़ा लायेंगे,
शांति ,ऐकता, विकास, समृद्धि,
हर युग की मांग,
विवेकानंद ,दयानंद, दंडायन ,अलख हम वेदी जगाएंगे !!!!

*जय हिंद*
*Nk सनातन

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