~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

Quill pen, inkwell and open manuscript pages

NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

किसकी दिवाली,कैसी दिवाली !!??

★ अपनी तो बहुत मन गयी चलो इस बार उनकी दीवाली मनवाई जाए ★

हमने- तुमने कई दिवालियां मनाई हैं अब तलक
कल फिर दीवाली है
चलो इस बार दुसरो की दिवाली मनवाए ले मन की ललक
एक भौतिक रौनक प्राकुतिक हो लाई जाए

यानी कि उन घरों में भी तेल-घी के चराग रोशन करें
उनकेँ घरों को भी सज वाये ओर चेहरे पे मुस्कान बिखेरे
चलो उनकेँ बदनो पर भी नये रंग-बिरंगे लिबॉस देखे जाएं

चलो कुछ ताज़ा लज़ीज मिष्ठान्न उन्हें भी उपलब्ध करवाए
आपने- हमने तो बहुत खाये है चलो उन्हें भी वो स्वाद भरपूर चखाये जाए

कुछ पटाखे ,आतिशबाजी उनकेँ आंगन में भी करवाये
कुछ शोर उनकेँ दिलो के भी सुने जाए

इतने सालों में हमने बहुत कमाया-धमाया, बहुत संजोया है
ओर लक्ष्मी जी की मेहरबान रही हैं
चलो इस बार उनसे भी लक्ष्मीपूजन कर वाया जाय
भूखे भजन न होत गोपाला
तो चलो इन्हें भरपूर खिला-पिला
उस महा शक्ति के भक्ति ज्वार से मिलाया जाए

हम कई सालों से दीवाली मना रहे हैं
ओर लक्ष्मी पूजन भी कर रहे हैं
चलो उन दरिद्रों को भी श्रीलक्ष्मी माई से मिलाया जाय
आरती-अर्चन,धूप-दीपक,वंदन-चंदन
मेवे मिष्ठान के प्रसाद से गुलज़ार किया जाए

चलो इस बार उन मजलूमों की भी दीवाली मनवाई जाए
कुछ जेब तबियत से ढीले किये जायें
उन गरीबो -विपन्नो की भी दीवाली मनवाए
उनकेँ घरों के भी चराग रोशन किये जायें

चलो दीपक जलवाए
इस तरह अपने मष्तिष्क की दीवाली जले न जले
लेकिन ये तय है-2
के अपने मन की दीवाली खुद ब खुद मन जाएगी
तबियत बहल बहल झूम झूम जाएगी
रुत सुहानी सदाबहार सावनी- बासंती हो जाएगी

ओर तब जब उनकेँ चेहरे पर दमक ओर होठो पे खुशी देखोगे
निश्चित- 2 अपनी दीवाली अपने आप मन जाएगी

तब मन के चराग कभी न बुझने वाले अपने मन मे जलते रहेंगे
ये सुंकु मन मे दीवाली के चराग इक रोज नही हर रोज खुशी देते रहेगे
अगली दीवाली तक

ओर अगली दीवाली फिर दियो में तेल भरना है
उन्हें उस लायक करना है
की वो खुद दीवाली मना सके अपनी तरह हर बार

घर रोशन रहे उनके सदा खुदा का फ़रिश्ता बन ये खुदाई काम कर जाना है
यानी देश के हर जन की दीवाली-ईद-क्रिसमस रोज रोज मनती रहे
देश,सरकार चले नेकी पर
अमन चैन शांति सुख समृद्धि से समा महकता रहे,चमकता रहे ,दमकता रहे
इस बार नही सदाबहार,खुशियों का दामन भरा रहे बिखरा रहे ।
*NK सेवक ”सनातन”
*रचना क्रियान्वयन दिनांक 4 नवम्बर,2021( रचनाकाल अल सुबह मावस लेकिन पूर्णिमा के उजालो तक )
दीवाली हिन्दू महोत्सव पर मेरे देश के सामर्थ्य जनों को आंदोलित होने को समर्पित।