~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

कुछ उछलते खयाल

कुछ उछलते खयाल

कुछ उछलते खयाल

*सितारों सा है तो मुकद्दस मुकद्दर अपना
लेकिन मलाल बस यही की दूर बहुत है !

*सितारों सा , है तो मुकद्दस, मुकद्दर अपना
लेकिन मलाल, बस यही की, दूर बहुत है !

चाँद की खूबसुरती पर कई कसीदे पढ़े गए हैं ,उकेरे गए हैं!
उसकी उधार की जिंदगी के बारे कहूं ऐसी खूबसूरती के क्या मायने की रोज-रोज ब्यूटी पार्लर जाना पड़े !!

*चाँद की खूबसुरती पर कई कसीदे पढ़े गए हैं ,उकेरे गए हैं!
उसकी उधार की जिंदगी के बारे कहूं ऐसी खूबसूरती के क्या मायने की रोज-रोज ब्यूटी पार्लर जाना पड़े !!

*इन्द्र देव 4 महीनों तक बरसात के ज़रिए रो-रो के अपने गम भुला मन हल्का कर लेते हैं
लेकिन एक सांसारिक आदमी के कितने गम होते हैं वो बेचारा तो सामाजिक घेरे की वजह से रो भी नही सकता

*इंद्रदेव के आंसू धरती की खुशियां हैं ;
काश आदमी के आंसुओं की यही तासीर होती !

इन्द्र देव बरसात के ज़रिए आँसु बहा अपने गम हल्का कर लेते हैं ;
लेकिन एक सांसारिक आदमी सामाजिक घेरे की वजह से दो आँसु भी नही बहा सकता !

इन्द्र देव बरसात के ज़रिए सरे आम आँसु बहा अपने गम हल्का कर लेते हैं ;
लेकिन एक सांसारिक आदमी करे तो कैसे सामाजिक घेरे की वजह से वो दो आँसु भी नही बहा सकता !

*ध्वनि अमर है आत्मा अमर है तो
फिर शरीर के मरने का क्या गम है
*nk sevak ‘सनातन’