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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

गोड ऑफ क्रिकेट :सचिन तेंदुलकर का 50 के हुवे!

[24/04, 15:10] N K Sevak: ** सचिन मास्टरर -ब्लास्टर के जन्मदिन 24 अप्रेल के साथ Nk सेवक “Sanatan” जिसका birthday 25 अप्रेल है पर क्रिकेट आईपीएल का तड़का***

साथियो विशेषकर क्रिकेट प्रेमियोँ कल भारत के महानतम क्रिकेयर्स में से एक
Suchin
Ramesh
तेंदुलकर
का जन्म दिवस है और सुनील मनोहर गावस्कर के बाद यदि किसी क्रिकेटर ने मुजे प्रभावित ओर अनुरंजित मुदित ओर आल्हादित किया है तो वो हैं
सचिन
तेंदुलकर
ओर कल 24 अप्रेल को उनका जन्म दिवस
यानी कल वो 45 की वय के हो जाएंगे
क्रिकेट जगत ने उन्हें क्रिकेट का भगवान माना
Fb साथियो सचिन के ठीक एक दिन बाद इस नाचीज़ का भी जन्म दिन है लेकिन उत्साह कम क्योकि अब उम्र बढ़ने का नही घटने का अहसास होता है!!!😊😊😊😊
I P L आईपीएल ओर दर्शक भीड़

  • मेरा इंटरव्यू अपने आप से its like monologue
    -कुछ अटपटा
    +कुछ चटपटा
    ^कुछ पटपटा
    ^कुछ लचलचा

( मेरा इंटरव्यू अपने आप से जिसमे मैं खुद चीफ गेस्ट as an क्रिकेट एक्सपर्ट हूं और खुद ही एंकर हूँ गेम्स एंड स्पोर्ट्स ।)
*इसका उद्देश्य आलोचना समालोचना के पूट में मात्र मनोरंजन और व्यंग्य क्योकि मैं क्रिकेट का one of the biggest fans लेकिन IPL के 10 edition का कोई match नही देखा 11 th edition चल रहा है और कभी कभार अनमने ढंग से 5-7मिनिट तड़का-फड़का-फटका देख लेता हूं
जबकि टेस्ट मैच मैं जुनून की हद तक मतवाला होकर देखता हूं
ओर one day इंटरनेशनल मैच भी मन के ज्वार से देखता हूं
T-20 इंटरनेशनल भी पूरे शबाब से देखता हूँ क्योकि दो देशों की टक्कर या मुकाबला मायने रखता है और हार-जीत आपको भावनात्मक ऊँचाई पर ले जाती है जिसमे खुशी -दम ओर सर्वोपरि देशभक्ति।
मैं देश से इतर दूसरे देशो के मध्य मुकाबले भी बड़े चाव व ताव से देखता हूं क्योंकि क्रिकेट मेरा passion है।

*प्रश्नोत्तर—-

  1. आईपीएल l P L के आप प्रशंसक नही हैं लेकिन आप देखते हैं देश मे इसे बला की हद तक पसन्द किया जाता है और इसका प्रमाण है स्टेडियम में कैपेसिटी क्राउड ओर चप्पे चप्पे पर दर्शक जिसमें दर्शक अपने सपोर्टिंग खेमे की क्रिकेटिंग पोशाके पहन आते हैं और माहौल चारो तरफ रंगीन नजर आता है। इस बारे में आप की क्या प्रतिक्रिया है ?????
    *देखिए सबसे पहले में भीड़ पर बात करूंगा कि हिंदुस्तान में भीड़ कोई बड़ा मुद्दा नही क्योकि जनसंख्या सवा करोड़ से अधिक है और बुद्धिजीवी वर्ग अधिक नही है वो ऐसे की एक पागल किसी नुक्कड़ पे खड़ा हो कपड़े फाड़ने ओर चिल्लाने लगे तो वहां देखते ही देखते होंडाहोड़ी मच जाती है और जमावड़ा देखते ही बनता है निर्रथक तमाशा देखने क्योकि कितना ओछा निम्न स्तरीय मनोरंजन हो हम भारतीय नही चूकते ओर बहती गंगा में हाथ धोना भारत मे ऐसे ही नही बना।अतः भीड़ मात्र लोकप्रियता का ग्राफ नही…!
  2. आईपीएल के बारे में सकारात्मक कोई बिंदु हो तो आपकी दृष्टि में वो क्या हो सकता है?
    *हां अप्रेल -मई माह शून्यकाल काल माना जाता है क्योंकि बेतहाशा गर्मी और शैक्षणिक अवकाश खेती-बाड़ी-कृषि के हिसाब से पड़ाव का काल। व्यवसाय के हिसाब से मंदी
    ओर फिर ये मैच शाम से शुरू होते हैं तो दर्शक उमड़ते हैं।
    3.दर्शक दीर्घा में जो दर्शक उपस्तिथी या मौजूदगी दिखती है उस संदर्भ में आप क्या कहेंगे ?
    *देखिए इस विषय मे की जो दर्शक वहाँ मौजूद होते हैं वो यदि वर्गीकृत करे तो 5-6 प्रकार ठहरेंगे
    जिसमें प्रथम प्रकार वो की कुछ दर्शक सिर्फ पिकनिक पर्पज से वहां आते हैं जिनका खेल से कोई लेना देना नही वो सिर्फ खाने पीने मौज मस्ती के किये अवतरित होते हैं
    दूसरे वो दर्शक जो सिर्फ मनोरंजन अनुरंजन चाहते हैं कोन खेल रहा है कौन छक्के मार रहा है आउट हो रहा है उन्हें हर हाल में मनोरंजन करना होता है
    तीसरे जो मानसिक स्ट्रेस लेना नही चाहते ओर लाइट किस्म या प्रकार का ओछा मनोरंजन चाहते हैं
    चौथे वो जिनके पास खर्च करने को बहुत पैसा है तो आ गए और उनकी उपस्तिथी ही उनका सुकू होता है
    पाँचवे सेलेब्रिटीज़ को निहारने के अवसर प्राप्त करने आते हैं जैसा कि मशहूर फ़िल्म अदाकारा श्री देवी की अंतिम यात्रा में अन्य अभिनेताओं-अभिनेत्रियों को देखने वाले 50 फीसद लोग थे उन्हें शव यात्रा से कोई लेना देना न था
    अन्य जो सिर्फ TV में कैद हो धन्य होने आते हैं
    ओर एक विशेष प्रकार के असल क्रिकेट प्रेमि की–
    न मामा तो काना मामा ही सही
    अर्थात कुछ न होने से कुछ होना अच्छा है और भारत मे क्रिकेट की शून्य सीजन से यदि लाइट वेट मनोरंजन हो जाय तो क्या फर्क पड़ता है।
    4.महोदय अंतिम सवाल ये की आईपीएल को आप किस रूप में देखते हैं
  • देखिए BCCI हर हाल में धन कूटना चाहती है और धन कुबेरों को ओर धनी बनाना चाहती है और खिलाड़ियों को भी धनार्जन हो जाता है और दर्शक वर्ग का भी चाहे जैसा लेकिन मनोरंजन तो हो ही जाता
    लेकिन ये टेक्स के दायरे में आवे ओर प्रतीक आय इनकम पर ख़िलासी ओर फ्रैंचाइज़ी को देश विकास में अलग से इनकम का 50 %स्वेच्छा से देना चाहिए तो ये टूर्नामेंट हितकर है।
    अंतत एक ओर बात जो आपने नही पूछी है जबकि वो महत्ती है वो ये की आईपीएल के सारे मैचेज एस्ट्रो टर्फ यानी कृतिम घास पर खेले जाने चाहिए और देश मे जल बचत को बढ़ावा देना चाहिए क्योंकि ये टूर्नामेंट भौतिक रूप में आयोजित है और क्लब स्तरीय हैं जबकि अंतरराष्ट्रीय प्रत्येक मुकाबला प्राकुतिक भावमय होता है जिसमे देशभक्ति ओर अलग तरह की सवेदना ओर रोमांच होता है जिसमे एक हार मायूसी ओर जीत खुशी दे सराबोर कर देती है।
    धन्यवाद आपने मुझे आमंत्रित किया और एक ओर बात की इस आमंत्रण की मैने कोई राशि नही ली है
    प्राचीन भारत मे वेश्याओं यानी कनीज़ों ओर गुलामो की नीलामी होती थी
    अफसोस हैरोज़ जी भी हो रही है किसी क्रिकेयर्स हीरो ने इस शब्द पर आपत्ति नही की है
    उन्हें अपने राष्ट्रीय हीरो ओर आदर्श होने का अहसास हुआ चाहिए
    इसके लिए अनुबंध शब्द
    या
    स्टेटस कॉन्ट्रैक्ट
    उचित है….!
    ** NK सेवक “सनातन”💐💐💐💐💐💐💐💐👌👌👌👌👌👌👌👌👍👍👍👍👍👍🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂
    [24/04, 15:37] N K Sevak: गिनती की दुनिया में मेरा इक और साल कहने को तो बढ़ गया
    लेकिन कड़वी हकीकत के साल इक और था जो घटा गया….
    और बढ़ने के नाम घटना ही कहानी है
    और अफसोस चंद्रमा की तरह घटते क्रम बाद जीवन में पूर्ण मासी की कोई कहानी है
    बस अमावस्या घनघोर
    जहा से सब अदृश्य
    जाने ले जाता कोनसा तन बन चित चोर
    😒🎻😒
    ☔☔☔☔☔☔
    ❤️🌈❤️

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