~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

दर्शन सस्ते अगर रुपये किये हस्ते

दर्शन सस्ते अगर रुपये किये हस्ते

हर मंदिर पर भीड़ क्यो इकट्ठा की जाती है
शाही दर्शन का चलन क्यो
रात-दिन मंदिर रहे खुले क्यो नहीँ रहते हैं
बात रूप-श्रृंगार की तो
जो खुद रूप श्रृंगार का पर्याय
उसे इसकी कहाँ जरूरत
ये महज़ व्यावसायिक चलन है
ये रुकना चाहिए
भक्त परेशान
भीड़भाड़,अफरातफरी ओर अकारण कारण बन असामयिक मौत,त्राहिमाम ,क्षोभ्, विलाप
दर्शन जब काल , दाह बन जाये
भगवान ये तो कतई नहीं चाहते
हे मानव है ये तेरी व्यवस्था ,भूल अव्यवस्था
ओर मुझे कोसना
ओर कहना
हे भगवान ये तेरा कैसा इंसाफ है
ये क्रूरता ये निर्ममता
कहा तक ठीक है
ठीक है पर पूछ खुद खुद से
क्रूरता, निर्ममता में तू क्या मुझसे कम है
तेरी क्रूरता निर्ममता प्रत्यक्ष है
मुझ पर तेरा ये इल्ज़ाम सरासर असत्य है
मैं तुझसा नहीं
तुझमे ओर् मुझमें बड़ा फर्क है
तू देव-दानव का मिश्रण
जबकि मैं सिर्फ़ ईश्वर
सब देवत्व सा सम हूँ।
*nk सनातन