फ़लसफ़ा ऐ सनातन
*फ़लसफ़ा ऐ सनातन
1.ऐ जहां के आदमी मैं जिंदगी हूँ
तेरी कई मंझील हैं मगर सब खोने वाली
मेरी तो सिर्फ एक ही है वो भी पाने वाली!
*NK सनातन
*जिंदगी रफ्तार से गुज़र रही है
सफर चल रहा है जाने कब तक
सांसारिकता के नाम गुजरने वाले दिन आते हैं बिता कल बनने को
पड़ाव के नाम सिर्फ राते ही आती हैं
वो भी बेचैन!
*NK सनातन
जीवन मे पाकर खोने वाली मंजिलें तो बहुत है
पाने वाली मंझील तो सब की सिर्फ़ इक ही है।