~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

वाहें ओर आहें: महाराणा प्रताप ओर हक़ीम खां सुर के अक्स में!

राणाप्रताप-हक़ीमखां सूर की वाहे ओर आहे
हे भगवन मेरे मेवाड़ को ये क्या हो गया है
हर आदमी लेकर अपनी जात क्यो लड़ रहा है
धरम -मजहब के बेर में मेवाड़ जल रहा है
हे भगवन ………..

एक वो मेरे रॉज -काज में , कौमी एकता का सुर था
जाति-धरम का बेर नहीं , सौहार्द्र का गीत था
ओर तो ओर हक़ीम ख़ाँ सूर, मेरी सेना का सिरमौर था
वो खुर्शीद ऐ इस्लाम मै हिन्दवाणी सूरज
लेकिन लघुता का नहीँ कही दौर था
हिंसा-प्रतिहिंसा,नफ़रतों का नहीं कहीं ठौर था
मगर ये क्या हो गया है ,मेवाड़ जल रहा है
हे भगवन…..

तुम इस्लाम को लेकर शंकाओं में वो हिंदुत्व को लेकर दरकारें
मगर देखो हक़ीम खाँ सूर हैं मेरी सरिताओं में
जाति-पाती धर्म नहीं वफ़ादारी बस चाहों में
राजपूत भील मीणा रावत ओर गाडुलिया
संग उनके हक़ीम ओर सूर वंश के सुरमा
समर लड़े वो बड़ा भारी लेकर रणभेरी हुंकारे
भरे रहे मादरे वतन वफ़ादारी के भावों में
कट गए पर नहीं बटे मेवाड़ी रॉज बचाने
चलो हक़ीम खां सुरमा मेरे चलो ये अपना मेवाड़ नहीं
जल रहा ये क़ौमी-मज़हबी ले कर दिल की तिराडे
अजानों से खलल उनको पूजाओं से दिक्कत उनको
धर्म है पर धर्म नहीं इंसानियत का ये दौर नहीं
एक वो दौर महाराणा जाते इमरत रसूल बाबा लेकर रेशमी चादर
लेकिन अब नफ़रतों की बयार है
अब ये वो मेवाड़ नहीं अब वो शान ऐ मिसाल नहीं
हे भगवन…..

हक़ीम खां सूर ओर उसके लड़ाके मेवाड़ धरा के सच्चे रखवाले
उनकी शहादत के क्या कलमें पढू
वफ़ादारी के वो मतवाले
जाति धरम नहीं मादरे वतन सबसे अजीम पीर रही उनकी उड़ाने
वफ़ादारी ओर खुद्दारी फ़र्ज़मन्द रही उनकी आवाजें
चलो हक़ीम सुरमा मेरे आज के मेवाड़ का दिल इतना विशाल नहीं
छद्म इनकी इंसानियत ये वो उदार सहिष्णु धर्मवीर नहीं
हे ईश्वर हे ख़ुदा आये क्यो हम अपनी फख्र ऐ जहाँ
ये क्या देखा हमने ,अब एक पल भी नहीं ठहरना हमें
चलो हक़ीम ये अपना छोड़ा मेवाड़ नहीं
हे परमपिता परमेश्वर हे महामहिम परवरदिगार
सन्मति दे इनको बस यही आह यही है गुहार
की हिलमिल रहे और हो वही कौमी भाईचारा सद्व्यवहार
चाहे लिए इसके हम दोनों को भेज दे नर्क या के जहन्नुम पुकार
अलविदा अलविदा अलविदा ओ प्यारे हमारे मेवाड़।
** nk सेवक “सनातन”