~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

Quill pen, inkwell and open manuscript pages

NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

सर्व ग्राह्य विद्यालय प्रतिज्ञा

सर्व ग्राह्य विद्यालय प्रतिज्ञा

विद्यालय विद्यार्थी प्रतिज्ञा
हम ……………..स्कूल के विद्यार्थी यह प्रतिज्ञा करते हैं की हम अपने कर्तव्यों का, भलिभाती पालन करते हुवे ,बड़ी लगन एवम निष्ठा से अध्ययन कर, भारत राष्ट्र के सु एवम जिम्मेदार नागरिक
बनेंगे । हम अकादमिक एवम व्यवसायइक शिक्षा से ऊपर अपनी नैतिक शिक्षा और भलमनसाई सिद्धांतों को सर्वोपरि रखेंगे ! हमारा उद्देश्य केवल जीविकोपार्जन नहीं वरन इक सुसंस्कृत , सुदृढ एवम सुविकसित राष्ट्र के निर्माण में अपना प्रत्यक्ष एवम अप्रत्यक्ष योगदान कर महान संत स्वामी विवेकानंद एवम महान दर्शनवेत्ता आचार्य श्रीराम शर्मा के आध्यात्मिक ज्वार एवम दर्शन को बल देते हुवे राष्ट्र को नैतिक रूप से भी सबल, समृद्ध एवम उन्नत करेंगे ! हम अंधविश्वास एवम सामाजिक कुरीतियों को नष्ट कर आधुनिक एवम तार्किक सत्यों के अनुरूप वैज्ञानिक मूल्यों को स्थापित कर सामाजिक एवम वैश्विक समरसता को बल देंगे ! हम अपने निज धर्म की वास्तविक ऊंचाइयों को व्यवहार में भी छुएंगे। हम देश एवम सामाजिक सेवा के लिए हमेशा तत्पर रह परम वैदिक सिद्धांत ~
’वसुधेव कुटुंबकम’ एवम ’सत्यमेव जयते’ रीति~नीति के अनुरूप अग्रणी रहेंगे! हम देश में आत्मिक सौहार्द और परस्पर दैविक व्यवहार को महत्व दे हमेशा सहिष्णु एवम आत्मिक रहेंगे !
ईमानदारी और सद्दव्यवहार हमारी पूंजी होगी और हम सच्चे मानव बन जातिवाद एवम छुआछूत जैसे सामाजिक दंश को समूल समाप्त कर लोकतांत्रिक भारत वर्ष को महान सम्राट समुद्रगुप्त के स्वर्णकाल सा पुनः समृद्ध रूप देंगे! जय भारत , नमन गुरु पदम, वंदे वृहद ~विशद एवम उदार सनातन वैदिक परंपरा और प्रवत्ति की। नमामि गंगे, नमामि पर्वत राज हिमालय, नमामि हिंद महासागर !
*NK सेवक “सनातन”
~स्वरचित
Date :4 नवंबर,2022