~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

From Sanatan's Writing Blog

आप भी अटल बिहारी हो सकते थे !?!

**आप भी अटल बिहारी हो सकते थे !?!*

[ राजनीतिक क्षेत्र मे-यानी आसमान छू सकते थे ]

 

आप कवि थेऔर कोई मामूली कवि नहीं !

बड़े ख्यात ,बडे विराट कद वाले

और राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय छवि वाले

 

आप आप की तरह या आप उनकी तरह कवि हुवे

लेकिन अटल बिहारी भी बड़े गज़ब हुवे

कवि अटल बिहारी प्रखर राजनेता, बेबाक राज नेता,

लाजवाब प्रभावी विनोदी सटीक व्यंय विधा के साथ उन्मुक्त प्रखर वक्ता

 

आपकी शेक्षणिक जी ओरो की तरह इस पर सवाल नहीं उठा

योग्यता आपकी समृद्ध , विरल-

की तीनों साहित्य-हिंदी,अंग्रेजी,संस्कृत में स्नातक

और सियासत शास्त्र में परा स्नातक, वाह !!

 

पिताश्री आपके एक ख्यात कवि-

बृज भाषा, खड़ी बोली -अवहट्ट के

 

तो बेटे में भी विरासत यानी डीएनए वही गुण

पिता से !

 

और राष्ट्रीय ,

अंतरराष्ट्रीय कद के कवि-

पहले श्रंगार लिखा, फिर वीर रस, फिर केसरिया धवल देशभक्ति ज्वार

 

आप दुनिया के सबसे बड़े समूह यानि संघ के सदस्य बने

 

फिर सुसंस्कृत परिवार यानी

सुसंस्कार ही सुसंस्कार !

 

कवि मंचो के नायक ,आकर्षण,विकर्षण,घर्षण

की हर तरह के श्रोता मुग्ध हो जाए!

 

फिर राजनीति के वृहद हस्ताक्षर

और कवित्त शेली-व्यंग्य के

तीक्ष्ण बाण

बुरा न मानो होली है-

कोई बुरा नहीं माने

सब रंग में रंग जाए

हँसी ठोठली सब लॉट-पोट आनंदित हो जाए !

 

चुटकी ले ले उड़लने का उम्दा अंदाज़

क्या तरल भाषा प्रवाह

कि बहें गंगा- बहता उसमे कचरा भी पावन धार- उपहार !

 

कमाल ये की की अजातशत्रु

यानी घोर-धुर आलोचक भी मेहरबान ,कद्रदान !

सुनने में आया कई बार की-

कि उनके राजनीति विरोधी, प्रतिपक्ष भी देता दाद !

 

और आदर सम्मान से नवाज़ता मिलाता हाथ !

 

फिर कबिता हिस्से रखी राजनीति किस्से

जी गुरु छाए ऐसे -कि सारे नक्षत्र, पिंड हो साथ जिसके

 

तीन से तीन सो पार

आप देश के आत्मिक सिरमौर बने

 

लेकिन कविता का शौक ज़ारी रहा

राजनीतिक कद ने आपकी कविता को औऱ ऊंचा बनाया

जो कविता अब तक आम थी

जगजीत सिंह ने गाई आपबे भी गाई

देखते ही देखते कविता का कद सर्वव्यापी राष्ट्रीय हो गया !

 

ऐसा ही होता है जो चीज़ अनजान हो

आपका राजनीतिक,कॉरपोरेट ,स्पोर्ट्स में कद बढ़ा

तब उसकज वो मामूली ची

खास हो जाती है

 

मैंने पढ़ा है प्रधानमंत्री मोदी की एक पेंटिंग जो अनजान थी

एक नीलामी में 75 लाख में बिकती है

ऐसे ही बॉलीवुड अभिनेता मशहूर स्क्रिप्ट राइटर और जावेद साब के जोडीदार

के पुत्र की इक पेंटिंग 55 लाख में बिकती है

ये वाचन खबर अखबार दैनिक भास्कर की है

 

 

लेकिन व्यवसाइक कवि अटल में कभी नहीं रहा !

उनका मूल मुख्य ध्येय राजनीति सेवा रहा !!

 

क्यों, क्योकि

कवि केवल शब्दों मे व्यवस्था सुझा सकता है, बया कर सकता है

 

भाव व्यक्त कर सकता है,व्यंग्य कस सकता है

यानी मंचों से, पुस्तकों से,अखबारों से,पत्रिकाओं ज़रियो से कह सकता हूं !

 

और हुक्मरानों यदि संजीदा है तो ध्यान खिंच सकता है

सुना भी सकता है

ये प्रकति ठीक गोलमेज सम्मेलन मे-असरदार सरदार, जांबाज़ भगत सिंह का

बहरों को सिर्फ़ सुनाने को बम फेंकना

सेंट्रल असेम्बली ब्रिटिश राज खाज में !

 

लेकिन आवाज सुनाना वो भी राजनेताओं को

सूरज को रोशनी दिखाना, बहरों को म्यूजिक सुनाने जैसा

 

ये सियासत दार बहरे होते है, अँधे भी लेकिन गूंगे नहीं

क्योकि मेनिफेस्टो वादा फरोशी चुनावी जुमले

में ये दहाड़ते हैं !

 

किसी बम की आवाज से बहरा फिर भी सुन ले

लेकिन हाय सरकार सुनले मजाल है

और सुन भी ले तो हैं कम

हाँ आंदिलन ,हड़ताल, अनशन से ये देर से ही सही लेकिन दावे दबाव में सुनते हैं

वरना उनके कानों तक जू तक नहीं रेंगती !

 

स्तिथि कितनी ही बदहाल

जनता अपना रोना

सार्वभौमिक रोना रो सकती है आंदिलनकारी रो सकता है !

 

लेकिन कर कुछ नहीं सकता सकते !

 

इसके लिए उसे सियासत में जाना जरूरी है

पक्ष में है तो विषम व्यवस्थाओ को सम बना सकता है

और यदि प्रतिपक्ष में है तो-

सिस्टम में यदि खामी ,कमी तो आवाज़ उठा सकता है !

 

आप अटल ने राजनीति में प्रबलता ,प्रभाव दिखाया

और देश के सिरमौर बने और राजनीति में नव आयाम दिए

 

लोकतंत्र को आकाश दिया और भारत रत्न भी हुवे

 

तो बात इस प्रस्तावना की कि-

डॉक्टर हाँ चिकित्सीय नहीं

पीएचडी वाले

 

ये डॉक्टर बड़ा शंकित शब्द-

कि जानना मुश्किल , अनुमान लगाना मुश्किल-

की , कि बंदा कौनसे वाला डॉक्टर है ?!!

 

विद्यावाचस्पति या मेडिकल साइंस वा

 

तो मैं बात कर रहा हूँ-जनाब कुमार विश्वास की

भारत के मुखर मंचिय कवि की, छवि की

 

आप एक अति सफल व्यावसायिक कवि अंतरराष्ट्रीय,राष्ट्रीय कद के सिरमौर शिखर कवि

 

आप युवा धड़कनों की जान

आप कविता को लेकर युवा हृदय सम्राट

 

श्रृंगार रस के बेताज बादशाह

किस्सागोई ,हाज़िर जवाब ,व्यंग्य विनोद के लहरी

 

ध्वनि में गजब का आकर्षण,जादू

छवि में कुमार प्रधुम्न कामराज

 

मोहक अंदाज़, विरल प्रस्तोता

कि श्रोता घंटों सुनता ही जाय

और तालियो की करतल ध्वनी से श्रोता दीर्घा गुलज़ार बाग -बाग हो जाए

 

 

लेकिन बात उनकी कविता कि नही-

वो तो सर्वत्र ख्यात, ज्ञात है

 

तो बात क्या ???

 

जी बात ये आप सोच नहीं सकते

सनातन सोच के जहीन मायने !

 

आपकी कवि छवि राष्ट्रीय जन नायक की

नव युवान पीढ़ी आपकी मुरीद बड़ी

 

रामलीला ,जंतर- मंतर ,इंडिया गेट

धरना नोटंकी

महा हितेषी बनने की बड़ी एक्टिंग

 

दामिनी या निर्भया गैंग रेप त्रासदी जो न्याय पुकारती

अन्ना गांधी अनशन प्रभावी

 

साथ मे केजरी, रामदेव,भूषण प्रशांत

शांत सिसोदिया

और अनेक मौकि भोकि चौकी जोकी और पीच्छलग्गु चापलूस विक्रांत

 

उधर लोहा गर्म अरविंद ने हथौड़ा ठोक महत्वकांक्षा

टोह ली राजनीतिक दल

पार्टी बना फसल बो ली

और क्या कमाल जनता दिल्ली भी मोह ली

कद्दावर शिला को धराशाई कर गद्दी ली

 

अब बात खास पते की-

कि कुमार जो देश का विश्वास थे आवाज़ थे,अंदाज़ थे

उस झाड़ू पार्टी के सदस्य बने

 

निर्णय पर मुझे अफसोस रहा

की आप मात्र एक सदस्य बने

 

काश आपनेअपने थर्ड सेंस का प्रयोग किया होता

जब कविता किस्सा व्यंग्य विधा में सिस्टम को कोसते

तो आपको पता चाहिए था होना

की कि मात्र पार्टी सदस्य बनने से पर जीवी

 

यानी उस दल का सदस्य बनने से बेहतर होता कि

आप -खुद एक राजनैतिक दल मढ़ते

और युवाओं के तारणहार बनते

 

 

 

 

आप भी कवि से राजनीतिक सम्राट बन देश सेवा चर अनुचर बनने

देश को एक सुघड़ व्यवस्था देते

आप भी देश के प्रधानमंत्री मन्त्री बनते

 

मुझे जॉन मिल्टन कवि बहुत पसंद हैं

क्योकि उनका कथन कि स्वर्ग में गुलामी करने से बेहतर

आप नरक में राजा बन के रहो

और मै लडकपन से ही इसी सिद्धांत को अनुसृत किया

जबकि तब आप मिल्टन को नहीं पढ़ा

नेतृत्व का गुण जुनून शुरू से ही रहा

 

लेकिन कुमार मौका चूक गए

फिर बलि का बकरा अमेठी से चुनाव हारे

वो भी तीसरे स्थान राहुल गांधी स्मृति ईरानी पहले दूसरे

आप पार्टि के प्रवक्ता रहे

फिर कवि मंचो पर

हमारे वाला संबोधन से खूब हंसाया श्रोता गण को

बस निचोड यही की-एक राष्ट्रीय कद ग्राफ का व्यक्ति

देश की तर्ज़ ,मांग पर- खुद एक राजनीतिक पार्टी बनाता

और परजीवी उस पार्टी का सदस्य नहीं बनता

तो देश किसी और मोड़ पर होता

 

वो विद्वान था , अति लोकप्रिय भी

युवाओं का चहेता-यदि

राजनीतिक पार्टि खुद बनाता

शर्तिया “सनातन nk”आज ,कल देश का राजनीति ग्राफ

और इतिहास कुछ अलग होता

क्योकि अटल की राह इक कवि नैतिक अनुसरण कृत्य विशेष होता

 

 

की राजनेता सांसद, विधायक,प्रधान ,सरपंच

पांच साल में खुद फरारी फार्च्यून स्किर्पियो के मालिक न बन

जनता को ज्यादा नही आम को वो सब सुविधाएं देते

और क्रेटा कार के मालिक बनाते

और भगवान शिव की तरह जनकल्याण देश हित हलाहल पीते

और देश को तारते

!!

विकास की ब्रह्मपुत्र बहती

और लोकतंत्र के परचम लहरते

बांग्लादेश पिद्दी जहां हिन्दू हिंसा के शिकार

तब आप खुद कहते

की इतने अग्नि ब्रह्मोस पड़े हैं

छोटा भाई मोटा भाई क्या कर रहे

यू ही पड़े हैं 4-5 वहां चलवा देते

बेचारे हिन्दू आखिर किससे आस करेंगे

आप हिन्दू चेहरा तो इन्दिरा जी कि तरह जलवा दिखा देते !

*nk सनातन