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मेरा घर (My Home – A Stage Comedy Poem)
मेरा घर (मंचीय हास्य कविता) घर कैसा भी हो अपना – अपना हैं, है नहीं मेरा घर, बनाना सबका सपना हैं। बीबी…
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मेरा घर (मंचीय हास्य कविता) घर कैसा भी हो अपना – अपना हैं, है नहीं मेरा घर, बनाना सबका सपना हैं। बीबी…
Bhakti
मोहन का साया, है मुझे भाया, है क्या रसीला, क्या अजब रसीला, मुरली भी जिसकी, ने लुभाया, ऐसे ब्रज मोहन का साया,…
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लिखा बहुत होगा कइयों ने बूढ़ापे पर, मैं क्या उनसे बेहतर लिख पाऊँगा, लेकिन विषय मिला सो प्रयास कर बैठा, बूढ़ापा आने…
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यूँ तो ज़िंदगी का कोई भरोसा नहीं, मगर उम्र के जिस पड़ाव पर हैं भाई, कह सकते है गुज़री है अब तक…
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ज़िंदगी का फ़लसफ़ा अनुभव (तजुर्बा) रहा है अपना-अपना जीवन को कहा है किसी ने नगमा, किसी ने कहा है इसे इक नदियां,…
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काश के रंग चढ़ा के तुमने बदस्तूर रंग बदले ना होते दुनिया के लिए फ़िक़्र थी इतनी तुम्हे तो बेख़ौफ़ बाहों में…
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नाक ऊँची होना सुना है एक मुहावरा नाक चढ़ना मुहावरा सुना होगा। चेहरे पर सजी शान कवियों ने लिखा। चेहरे पर दो…
Bhakti
कितने अमीर – कितने ग़रीब, कितने पीर – कितने फ़क़ीर, कितने नबी, कितने अली, कितने वली कितने कबीर, कितने ईसा, कितने मूसा,…
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काश के रंग चढ़ा के तुमने बदस्तूर रंग बदले ना होते दुनिया के लिए फ़िक़्र थी इतनी तुम्हे तो बेख़ौफ़ बाहों में…
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ईंट-पत्थर के मंदिर तो बहुत हैं, पर असली मंदिर तो भीतर है; जहाँ रोज़ सत्य की आरती हो, वहीं ईश्वर बिना बुलाए…