*सितारों सा है तो मुकद्दस मुकद्दर अपना
लेकिन मलाल बस यही की दूर बहुत है !
*सितारों सा , है तो मुकद्दस, मुकद्दर अपना
लेकिन मलाल, बस यही की, दूर बहुत है !
चाँद की खूबसुरती पर कई कसीदे पढ़े गए हैं ,उकेरे गए हैं!
उसकी उधार की जिंदगी के बारे कहूं ऐसी खूबसूरती के क्या मायने की रोज-रोज ब्यूटी पार्लर जाना पड़े !!
*चाँद की खूबसुरती पर कई कसीदे पढ़े गए हैं ,उकेरे गए हैं!
उसकी उधार की जिंदगी के बारे कहूं ऐसी खूबसूरती के क्या मायने की रोज-रोज ब्यूटी पार्लर जाना पड़े !!
*इन्द्र देव 4 महीनों तक बरसात के ज़रिए रो-रो के अपने गम भुला मन हल्का कर लेते हैं
लेकिन एक सांसारिक आदमी के कितने गम होते हैं वो बेचारा तो सामाजिक घेरे की वजह से रो भी नही सकता
*इंद्रदेव के आंसू धरती की खुशियां हैं ;
काश आदमी के आंसुओं की यही तासीर होती !
इन्द्र देव बरसात के ज़रिए आँसु बहा अपने गम हल्का कर लेते हैं ;
लेकिन एक सांसारिक आदमी सामाजिक घेरे की वजह से दो आँसु भी नही बहा सकता !
इन्द्र देव बरसात के ज़रिए सरे आम आँसु बहा अपने गम हल्का कर लेते हैं ;
लेकिन एक सांसारिक आदमी करे तो कैसे सामाजिक घेरे की वजह से वो दो आँसु भी नही बहा सकता !
*ध्वनि अमर है आत्मा अमर है तो
फिर शरीर के मरने का क्या गम है
*nk sevak ‘सनातन’