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NK Sanatan's Writing Treasure

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Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

कोरोना जीवन संकट और भ्रष्टाचार

*जीवन संकट और भ्रष्टाचार
( कोरोना महामारी ,जीवन संकट और भ्रष्टाचार )
प्रिंट मीडिया है, कम्युनिकेटिव मीडिया है तो दुनिया मे कहाँ क्या हो रहा है पता चलता है। जनवरी 2020 में चीन के वुहान शहर की लैब से कोरोना वायरस उठा और सर्वप्रथम शहर में तदन्तर शनैः-शनैः सम्पूर्ण विश्व मे ये एक महामारी के रूप में पसरा । प्रारंभ में इसे इतना गम्भीरता से नहीं लिया गया लेकिन लगातार इसके जलवे से डब्ल्यू एच् ओ गंभीर हुवा ओर दुनिया को सचेत किया कि ये कोरोना एक महामारी है और इसके संक्रमण से तबाही मच सकती है । हालांकि निर्णय ओर घोषणा में विलंब हो गया गया था क्योंकि तब तक यूरोप में यह वायरस अपना स्याह रंग दिखाना शुरू कर चुका था। देखते ही देखते कोहराम मच गया ,लाशो के ढेर लग गए और चारो तरफ तबाही का मंजर था । इस महामारी के प्रकोप से कई प्रकार के नुकसान प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से विश्व के सामने आए और यू कहे कि सम्पूर्ण विश्व इसकी मार से असंतुलन के दौरे से गुज़र रहा है।
दुनिया मे सबसे कीमती क्या है ? “सिर्फ और सिर्फ जिंदगी और सबसे क्रूर,भयानक है तो मृत्यु। यू तो मृत्यु शाश्वत है ,एक न एक दिन समय-असमय आनी ही है।लेकिन महामारी के कारण जो जिंदगियां अकारण ओर समय से पूर्व लिली जा रही हैं ये असहनीय ,अस्वीकार्य है लेकिन इससे बचने के सिर्फ प्रयास ही किये जा सकते हैं जो देश और दुनिया के द्वारा पूरी तत्परता से किये जा रहे हैं।
कहते हैं कोरोना महामारी ने जीवन की कीमत सिद्ध कर दी है और जान है तो जहांन के सिद्धांत के अनुपालन में जिंदगी या प्राण को ज्यादा तरज़ीह देंने सरकारों ने लोक डाउन घोषित किया क्योंकि कोरोना एक महामारी है और इसका कोई सटीक इलाज भी उपलब्ध नहीँ ओर नहीँ ये वायरस दिखता है बस सीधा असर करता है।
कोरोना के ज्वार ने जिंदगी की कीमत बढ़ा दी और यकायक जिंदगी के लिए जिंदगियां घरों में थम गई। कोरोना एक भयानक संक्रमित करने वाला वायरस है तो सामाजिक दूरी यानी अंग्रेजी में ‘सोशल डिस्टेंसींग’ ही एक मात्र सर्वश्रेष्ठ ओर कारगर उपाय ओर इलाज़ था सो पूरे विश्व ने हाथोंहाथ इसे महत्व दिया और अपनाया। इस महामारी पर शोध चल रहे हैं लेकिन अभी दुनिया मे पूर्व में अन्य बीमारियों के लिए उपलब्ध दवाइयों से ही इलाज किये जा रहे हैं। इसका अंतिम लक्षण हैं सांस का फूलना या श्वास में भयानक तकलीफ़ जहाँ संक्रमित व्यक्ति को बचाना लगभग दुष्कर हो जाता है।
ये जो बातें मैंने अपनी टिप्पणी में किया है इसका मूल उद्देश्य देश -दुनिया मे व्याप्त ,फैले ओर चल रहे भ्रष्टाचार को इंगित करना है। कहते हैं कोरोना के भयावह तांडव में लोगो मे नैतिकता भर दी है जो प्रायः मृत अवस्था मे थी। क्या कोरोना एक निराकार अवतार हैं किसी महाशक्ति का प्रतिनिधित्व करते हुवे। क्या नैतिकता के मुल्यों को पुनर्स्थापन के लिए कोरोना का होना जरूरी था। क्या कोरोना दुनिया मे उपलब्ध सभी धर्मों ओर उनकी धार्मिक पुस्तकों में उपलब्ध सभी मानवीय मूल्यों से बढ़कर है? यदि हाँ तो फिर इन धर्मो ओर धर्मोपदेशों की क्या जरूरत है। तो फिर कोरोना सदा रहना चाहिए दुनिया मे यदि इसी से वास्तविक धर्म के मूल्य पुनः स्थापित होते हैं मानव के हृदय में।
इस दलील का मूल उद्देश्य ये है कि देश-दुनिया मे भ्रष्टाचार की जो सलिल सरस्वती नदी की तरह सदियों से बह रही है को कोसना है। दिनांक 25 मई,2020 को मैंने एक लब्धप्रतिष्ठ अखबार की सुर्खियों में पढ़ा कि एक जी एस टी अधिकारी ने 15000 ₹ की घुस ली। ऐ सी बी के छापे में उसके घर से लाखों रुपयों की अकूत लेकिन अजायज सम्पत्ति उसके गृह निवास पर मिली। उसी संदर्भ में एक आलेख था “भ्रष्टाचार की ये आहटें बर्दाश्त नहीँ होंगी ” के अंतर्गत ये बिंदु इंगित था कि जब जिंदगी का संकट सर पर मंडरा रहा है ऐसे में भ्रष्टाचार ,घूसखोरी , रिश्वत का खयाल आना भी असंभव होना चाहिए! लेकिब ये किताबी बातें हैं, किताबी ख़्याल है। हकीकत की दुनियां में इसका कोई महत्व नहीं। घूसखोरी आदमी के डी एन ऐ घर करे हुवे है और जो व्यक्ति साहसी हैं ये सोच रखे हुवे की ईश्वर कहाँ है, किसने देखा है और ईश्वर कहाँ कुछ देखता है … ओर देखता है तो देखने दो … ऊपर जा के देखा जाएगा ! लालच,लोभ ,अवसर, विवशता,सहजता, सुविधा ,अवैधानिक, अनैतिकता आदि माध्य घुस ओर भ्रष्टाचार संस्कृति को बरकरार रखे हुवे है और मानव उदर , ऐशोआराम की चाह के रहते यह विश्व पटल से लुप्त नहीँ हो सकता। हाँ वास्तविक धर्म के पालक ,अनुयायी इस दानवीय गुण को नकारते हैं और धिक्कारते हैं। भ्रष्टाचटा को भ्रष्टाचटा से निबटाने की जबरदस्त सुविधा से भ्रष्टाचार समाज और सिस्टम में रहेगा क्योंकि कोरोना जैसी महामारी ओर संक्रमण ओर विकट संकट दौर में जब कई लोगो ने ये स्याह दर्पण जारी रखा है, दिखाया है जिसके तहत पीपीटी किट, मास्क, राशन वितरण ,व्यापार व्यवहार में सरेआम घूसखोरी ओर भ्रष्टाचार दृश्य जीवन्त दर्शाया है तो कोरोना संकट उन्हें सही नैतिक मार्ग नहीं दिखा सकता है । हाँ मौत का आईना वो भी उनके अपने परिजनों को कोरोना दिखता है तो शायद उनके मन द्रवित हो जीवित हो उठे। ईश्वर उन भ्रष्ट लोगो को ऐसा कोई कराल रूप दिखाए बिना सद्बुद्धि दे ताकि मानवता जीवित रहे और शत प्रतिशत रहे।

NK सेवक ‘सनातन’