★नेता प्रादर्श कवि आदर्श ★
एक काव्य मंझरी का आयोजन रखा
जिसे आप काव्य संगोष्ठी भी कहते हैं
फेसबुक, व्हाट्सएप यानी सोशल मीडिया
ब्रॉडकास्ट,पर्सनल मैसेज
यहां तक कि व्यक्तिगत फोन भी किये
ओर अख़बार में बाकायदा खबर दी
वो ये की फ़ला-फ़ला तारीख
इस निश्चित समय पर कविता पाठ
हाँ काव्यधारा प्रवाहित कर दी जाए
आगन्तुक कविवर समय का विशेष ध्यान रखे
यानी 3 बजे माध्यान्ह
ओर काव्यसंगम का समापन हर हाल में 7 बजे सांय कर दिया जायेगा
बस क्या था वो रविवार ओर वो तारीख आ गयी
आयोजक मंडल वहां 1 बजे पहूँच गया
सारी व्यवस्था दूरस्त तंदुरुस्त कर दी
ओर 2 बजे से प्रवेश द्वार पर आयोजक तैयार
स्वागत के लिए
ढाई बजी तीन बजी कीसी के दर्शन नहीं हुवे
समय साढ़े तीन तब एक कवि नज़र आये
पूछा उन्होंने की मंझरी शुरू हुई
हमने कहाँ ठीक 3 बजे शुरू हो गयी
कवि झुंझलाते हुवे सॉरी लेट हो गया
वो अंदर हाल में प्रवेश कर गए
वहां दो तीन आयोजक थे जो ख़ुद कविता पाठ कर रहे थे
यानी काव्यपाठ जारी था बकायदा
सही मायने में अलकायदा यानी तुरन्त क्रियान्वयन
अब अंदर क्या हो रहा था द्वार खड़ो को नही पता था
तभी ठीक साढ़े चार दो कवि बंधु ओर पधारे
उन्होंने पूछा काव्यपाठ चल रहा है न
हमने कहा निस्संदेह 3 बजे चालू हो गया
आप बहुत जल्दी पधारे
अब वो वही अंदर
अब समयचक्र साढ़े पाँच बजा रहा था
तभी समय के पाबंद 3-4 कवि महाशय ओर पधारे
वो अंदर प्रवेश कर गए
तब घड़ी साढ़े 6 बजा रही थी
3-4 ओर भागते हुवे आये और हाल में
अब समय 7 बज चुके थे 5-6 काव्य रसिक ओर पधारे
ओर तभी द्वार खड़े पलक पावड़े बिछाए आयोजक भी हाल में
अंदर कुल बीस एक कवि जमा थे
अब तक आयोजन मंडल के 3-4 कवि हि पढ़ रहे थे
वो अनन्य कवि जो बारी बारी से बिल्कुल समय पर पधारे थे
इंतज़ार में थे कि एंकर महोदय अभी उनके नाम की घोषणा करेंगे
तभी एंकर संस्था के अध्यक्ष को मंच पर आमंत्रित करते हैं
वो कहते हैं—
आप सभी क्रांतिकारी, आदर्शवादी, सज्जन,समय के पाबन्द समय पर पधारे इसके लिए धन्यवाद
आप आगे भी ये परंपरा कायम रख हम आयोजको को ओर कवि गोष्ठी अगोजन का होसला देते रहेंगे
आप की जानकारी के लिए
हां जानकारी के लिए की मंझरी तयशुदा समय यानी 3 बजे शुरू हो गई थी
आप सब ने बड़ी जेहमत की इसके लिए धन्यवाद
आपने यह पधार कर काव्यपाठ किया
कृतज्ञ किया
इसके लिए हार्दिक धन्यवाद
आज की कवि गोष्ठी के विधिवत समापन की घोषणा करता हूँ!
जलपान की व्यवस्था थी लेकिन चुकी
आप समय पर पधारे तो समोसे ठंडे हो गए
ओर चाय-काफी भी इन्तज़ाए कर सो गई
यानी वो समोसे अब कुत्तों को फेंकेंगे
शायद ताज़ा नहीं तो वो भी उन्हें नज़रंदाज़ करेंगे
चाय को जमीन को पिला थोड़ा मीठा ओर गर्म कर दिया है
एक बार फिर धन्यवाद आप यू ही देश के प्रादर्श राजनेताओं की तरह अपना ये आईना ये आदर्श जारी रखें
अगली काव्यमंझरी की घोषणा शिघ्र की जाएगी
जय माते सरस्वती
जय भारत!
*nk सनातन