ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट का काला अध्याय
(1980-81 भारत का ऑस्ट्रेलिया दौरा )
नोट: अगर ऑस्ट्रेलियाई कप्तान ग्रेग चेपल सज्जनता का परिचय महान GR विश्वनाथ की तरह देकर अंपायर से फैसला बदलवा सकते थे और सुनहरा इतिहास बना सकते थे !
(गलत अंपायरिंग ओर भत्सर्ना वाला फैसला )
1980-81 सुनील गावस्कर भारतीय क्रिकेट के महानतम सलामी बल्लेबाज जो ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर बतौर कप्तान थे। 3 मैचों की टेस्ट श्रृंखला थी। भारत पहला मैच हार गया था दूसरा ड्रा रहा था ऑस्ट्रेलिया टीम के कप्तान थे महान टॉप आर्डर बल्लेबाज ग्रेग चेपल । मेलिबोर्न के ऐतिहासिक क्रिकेट मैदान पर 3 रा ओर निर्णायक मैच। ऑस्ट्रेलिया को मैच कम से कम ड्रा खेलना था श्रृंखला विजय के लिये । पहली पारी में भारत 237 के स्कोर पर आउट हो गया जिसमे गुंडप्पा विश्वनाथ के शानदार 114 रन थे। ऑस्ट्रेलिया ने अपनी पहली पारी में बहुत बड़ा स्कोर किया और 185 के करीब बड़ी लीड । भारत का एक पारी से हारना निश्चित था। ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी आक्रमण बहुत सख़्त था -लिली -पास्को , यार्डले लेकिन भारत ने दूसरी पारी में जबरदस्त जज्बा दिखाया और सुनील गावस्कर की अगुवाई में उनके ओपनिंग पार्टनर चेतन चौहान ने 165 रन बना लिए। लीड सिर्फ 20 रन रह गयी थी। ऑस्ट्रेलियाई दर्शक चुप्पी साधे थे। ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज हताश-निराश थे पहले विकेट के लिए। तभी ऑस्ट्रेलिया के अनुभवहीन नवोदित अंपायर महोदय ने अपने देश को मदद पहुचाई तब जब एक सीधी गेंद रफ्तार के जादूगर डेनिस लिली की महान ओर उस समय मजबूती के साथ जमे थे के पेड़ पर टकराई। निसंदेह गावस्कर बिट हुवे ओर अंपायर साब को तो ऐसे ही मौके का इंतजार था। उन्होंने तपाक से LBW आउट की अधूरे मन वाली अपील पर अंगुली उठा दी। जिसने ये क्लिप देखा है उन्हें साफ दिखेगा की अपील हल्की थी ओर लिली भी निराश थे लेकिन जैसे ही अंपायर ने उंगली उठाई उनकी बॉडी लेगेज बदल गयी। उधर सनी नाखुश थे इस निर्णय पर क्योकि गेंद हल्की सी बेट पे थी यानी बेट एंड पेड़ और नियम से वो नॉट आउट थर। उन्होंने अंपायर को विरोध दर्शाया की बेट एंड पेड़ है। तभी खिसियाए लिली भागे ओर सुनील गावस्कर के पेड़ पर इशारा कर बताने लगे। जबकि किसी बालर को अधिकार नही की सीधे बल्लेबाज से उलझे। मामला गरमा गया क्योकि आस्ट्रेलियाई क्रिकेटरो ने अनर्गल भाषा का प्रयोग शुरू कर दिया । गावस्कर ने भी आपा खोया ओर अपने साथी के साथ बतौर कप्तान वाक ओवर का फैसला किया लेकिन मैदान से बाहर जाने से पहले मैनेजर दुर्रानी ने मसला संभाल लिया और दिलीप वेंगसरकर मैदान में बैटिंग के लिए उतार दिए। उस महीन समय पर गावस्कर 70 ओर चेतन 80 पर खेल रहे थे। हालांकि वो मैच भारत जीता क्योकि ईश्वर बेईमानो का साथ नही देता। गावस्कर सही थे लेकिन इस एपिसोड ने उनकी ख्याति में दाग लगा दिया हालांकि वह सही थे। सनद रहे तब DRS नही था और तटस्थ अंपायरिंग नही थी। पहली बार महान तेज गेंदबाज इमरान खान ने तटस्थ अंपायरिंग की आवाज़ मुखर ओर बुलंद की ओर इसके कुछ सालों बाद तटस्थ अंपायरिंग शुरू हुई।
*उस रोज यदि गलत निर्णय नहीं होता तो दुनिया एक महान ओपनिंग पार्टनरशिप देखती ओर लिली के सामने गावस्कर का पहला शतक -दोहरा भी ओर चेतन का पहला शतक देखती। अफ़्सोस महान चेतन टेस्ट मैच में कभी शतक नही झड़ सके। भारतीय टीम ने दुनिल गावस्कर के नेतृत्व में पहली बार श्रृंखला बराबर रखी 1-1 से ओर इतिहास रच दिया । वो जीत भारत की 5 म्हणयम जीत में से एक है।
*nk सनातन