★● बस यूं ही..!★●
कविता गीत- “जिंदगी क्या है ? ! “
जिंदगी क्या है तुम पूछते हो वो पूछते हैं
हमने भी जीया है कहे चाहे जैसे भी
जिंदगी आज के खत्म होने
ओर बीते कलो की कहानी है
बस में नही किसी के ये
बस जिंदगी कुछ समय की कहानी है
समय मे सब समाए
रफ़्तार दिखती नहीं
मगर रफ़्तार की ही कहानी है
जिंदगी रिश्तों-नातों में बंधी-डूबी
आर्थिक रंग में सनी पेट की कहानी है
संसार की अजब लय मोह कहे या माया
डूबने ,बंधने-टूटने की निर्मम कहानी है
हर शख्स तड़प के आता
रोने से शुरू
चाहे कहे इसे खुशी
पर हक़ीक़त यही उस रोने में
खुशी-गम का सागर
वक्त वक्त पर व्यक्त झलकने की बेगानी कहानी है
औलाद कही पूर्व जन्म के अच्छे कर्म
तो कही बुरे कर्म की बानी है
कही बागबां तो कही अवतार रोते
कही मदर इंडिया के बिरजू-…….
कही श्रवण कुमार,श्रीराम
जनक को सुख देते
कुल मिला कर जिंदगी है तो बहुत कुछ
मगर चाहते कभी कभी न चाहने की कहानी है
क्रूर मौत ही इसकी मंझील
न चाहते हुवे भी छोड़ना ही असल कहानी है
औपचारिकताओं में बंधा सारा आलम
जिंदगी बस कर्म से बंधी
व्यस्ततम कहानी है
यूँ तो फुरसत नहीं कभी
बस निकालो चाह कर
तो जिंदगी मौजो की उछलती रंगी कहानी है
वरना जीयो मर-मर के
एक दिन अनजाने आएगा बुलावा
ओर दवा-दारू,ऐश-रुतबे धन-मन सब धरे के धरे रह जाने
ओर अचानक ही हवा निकल जानी है
इस तरह खेल चंद घण्टो का
तकनीकी है इसलिए फ़ोटो दीवार पे टंग जानी है!
*nk सेवक “सनातन”
[ रचना दिनांक 14 जुलाई,2021]