कृष्ण हां मुझे काला होना पड़ा !
आप राम हुवे दुनिया ना मानी
महा मानव थे पर आदर्श की ठानी
जब संकट आये मर्यादा न छोड़ी
दुसरो से मदद ले कर पार पाई
पर लोग तो लोग ही होते हैं
वे अच्छाइयाँ कम कमियाँ देखते हैं
सो श्रीराम तो राम सीता मैया पर भी हाँ लांछन तोहमत लांछन लगाई
हाय तब श्रीराम को लानत आई
ओर जीते जी समुद्र में जान वारी
तब अवतरित हुवे फिर अवतरित
इस बार आदर्श नही लिऐ सब चतुराई
साम- दाम -दंड- भेद यानी बन धर्माई
हां युद्ध ओर प्यार में सब जायज
मामा खुद भानजे का बना दुश्मन
ओ सत्ता के लिए ये आतताई अमानवीय
स्वपिता ,बहन -जीजा को दिया कैदखाना
इससे विभत्स रिश्ते का क्या आईना
यानी दुनिया सिर्फ अपना ही सोचती है
कुछ उदाहरण पितृ-मातृ भक्ति के
कुछ ले धर्म हुवे प्रहलाद बलवाई
ओ श्रीकृष्णा ओ हमरे कृष्णा
क्या खूब श्रीमद्भागवतगीता से दी उपदेशाई
राधारानी दिव्य दीवानी चरम प्रेम की विरल कहानी
रुक्मिणी के सजना अश्वभामा के दिल हामी
भक्तमय भारत, सर्व देशजन आर्यम हो कृष्णमय
जन्मदिन को ज्वार रहते आसमानी
हिन्दू सम्राट भक्ति रस राजी
ॐ श्रीकृष्ण मंगलयाय,राधारमण महाय
*nk सनातन