~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

जब हुक्मरान अपनी मर्जी या जिद्द वाला हो तो

■ 6/9 तुम भी सही हम भी सही ! ■

जब हुक्मरान अपनी मर्जी या जिद्द वाला हो तो
जनता जो आंदोलन करती है छोड़ देना चाहिए !
क्योकि इसका कोई फायदा नहीं
क्योंकि दोनों सही हैं ! अपनी -अपनी जगह,
उधर वाला हथेली पे 9 लिख आपको बता रहा है !
सामने से आपको 6 नज़र आ रहा है !
यानी दोनो ही सही हैं अपनी -अपनी जगह !
आप आंदोलन कर रहे हैं
तभी रुझान ओर परिणाम तय हो जाता है !
की सफल होगा असफल होगा !
ओर आप भी जिद्द पर
सरकार भी अपने निर्णय पर काबिज़
ऐसे में सोच ,मंथन का विषय
कि कानून का नुकसान तब होता जब होता
यानी बाद में होता
लेकिन आपको तो अभी हो रहा है !
आप कृषि काम छोड़ धरने पर है
आप आंदोलनरत हैं
आपको अभी तन-धन- मन की हानि हो रही है !
आपके साथी जान से हाथ धो रहे हैं !
मौतों की संख्या बढ़ रही है !
आपने भारत बंद कर भी देख लिया ;
परिणाम आता तो तुरन्त आता !
अब तो मामला लचर या के अधेड़बुन मे ही है !
ओर आपकी हार होना तय है !
उधर सरकार अपने स्वाभिमान ,अहम को चोट पहूँचाना नहीं चाहती
इधर आप किसान नहीं किसान यूनियन
तो बात उसी पर अटकी है
सुरक्षा और खाद्य समय को लेकर दोनो का नुकसान है !
क्योकि हुक्मरान अटल है ; ऐसे मे
झुकना आपको ही है !
देश हित मे इंतिजा,अनुनय-विनय है
की कोई एक झुक जाए
इस मुद्दे को ईश्वरीय निर्णय
या के प्राकुतिक प्रकोप या कोविड-19 जैसा भौतिक-नैसर्गिक प्रकोप मान ले !
*nk सनातन

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