◆ फलसफा जिंदगी का ! ◆
जिंदगी का फलसफाई
तजुर्बा रहा है अपना- अपना
जीवन को कहा है किसी ने एक नगमा
ये पराई किस ने कहा है अपना !
किसी ने कहा है एक नदियां
किसी ने माना कुछ नहीं दुनिया !
किसी ने माना एक पहेली
इत्तिफ़ाक़ रखता हूँ मैं भी
सभी फलसफ़ों से जुदा- जुदा
मगर दर्शन मेरा कहता खुदा -खुदा !
जिंदगी है कुछ नहीं
है तो बस इंतज़ार जुदा-जुदा
नीचौड़ कहें तो बस
इंतज़ार, इंतज़ार !
कभी सुरीला-सुनहरा तो कभी बेसुरा–बेसब्र इंतज़ार
मगर इंतज़ार,बस इंतज़ार
कभी बोज़िल कभी दिलकश इंतज़ार !
जिंदगी में ये होगा , वो होगा , सब होगा
अब होगा ,तब होगा, कब होगा !
कुछ सफल कुछ असफल प्रयास
मगर फिर भी इंतज़ार ,बस इंतज़ार,
कभी बनते सपने कभी बिगड़ते सपने कभी उलझते सपने
टूटते सपने सिमटते सपने
कामयाब सपने नाकामयाब सपने!
कभी हँसते सपने ,कभी बिलखते सपने,
कभी तड़पते सपने तो कभी मरते सपने,
कभी सुलगते सपने,
कभी उधड़ते सपने
कभी भटकते सपने
कभी झिलमिल सपने
कभी जलते तो कभी बुझते सपने !
कभी हँसींन तो कभी प्यारे -न्यारे सपने,
कभी हल्के तो कभी बोझिल सपने
कभी जागते सपने ,कभी सोते सपने !
कभी सच होते सपने
तो कभी अधूरे छूटते सपने,
मगर सब कुछ इंतज़ार
रोज -रोज कुछ नहीं इंतज़ार बस इंतजार !
सुबह हो तो शाम का ,
शाम हो तो रात का,
रात हो तो फिर सुबह का,
यूँ बस इंतज़ार ,इंतज़ार !
बचपन हो तो जवानी का
जवानी हो तो बुढ़ापे का
कुछ चाहते हुवे ,
कुछ न चाहते हुवे
बस इंतज़ार, इंतज़ार, इंतज़ार !
जीने का ओर मौत का अब आये तब आये कब आये ? !
बस मौत आने का, दुःखद- या- के -सुखद
इंतज़ार !
जिंदगी का सच, होना क्या है बुरा हश्र,
जलना या फ़िर दफ़न
मगर होना राख या फिर खाक ये है तयतम
सच खलता है , चुभता है, हँसता है
लेकिन करे क्या ?
यही जमाने का कड़वा सच है !
जीवन का पहिया रोकना है नहीं अपने बस,
उम्र का सफर थाम ले,
नही किसी के बस,
जिंदगी यूँ ही गुजरति है वांहो या आहों में,
कब किस घड़ी थम जाए जीवन का ये सुहाना , बेबस सफ़र !
पहेली अबूझ कब सुलझ जाए ,
हैं सब खबर पर बेखबर है !!
*NK सेवक ” सनातन “