हे ईश्वर सरवेश्वर देखा नही तोहे कभी
सिर्फ जाना मनीषियों ने
तू कल्पना कर तुझे मानव ने अपनी ही छवि में ढूं ढा
और ढा ला पत्थरो तस्वीरो में
ह्कुच
हे ईश्वर सरवेश्वर देखा नही तोहे कभी
सिर्फ जाना मनीषियों ने
तू कल्पना कर तुझे मानव ने अपनी ही छवि में ढूं ढा
और ढा ला पत्थरो तस्वीरो में
ह्कुच
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*महंगाई हर दौर का आर्तनाद ! * महंगाई हर दौर में देश के आम जन की आर्त आवाज़ रही है रोटी -कपड़ा…
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कइयों ने बहुत उंगलियों उठाई और तानाकशी भी की, हाँ मेरे किरदार को लेकर-2 लेकिन हम जरा सा भी न बदले लेकिन…
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न संतोष न आनंद अब फिर भी संतोषानंद जीवन इक गीत इक संगीत है इसके कई मन मेख या के रंजो गम…