◆ जिसने भी कही !◆
कितने अमीर कितने गरीब
कितने पीर कितने फ़कीर
कितने अली कितने नबी
कितने वली कितने कबीर
कितने ईसा कितने मूसा
कितने रूमी कितने सूफी
कितने हसरत कितने मोहम्मद
कितने हबीब ,कितने रकीब
कितने उलेमा कितने वल्लाह इब्राहीम
कितने आलिया कितने मौलवी
कितने साधु कितने संत
कितने मुनि शंकराचार्य
कितने आचार्य गुरुवर
कितने अवतार कितने महामानव
खिंचते एक ही लकीर
फ़लसफ़ा जिंदगी का,
इक ही इक तक़रीर
जिंदगी बस बनती बिगड़ती तस्वीर
जिंदगी नाम इक ततबीर
पाक-नापाक कर्मो भरी
कभी हसीन कभी बोझील
लगती चलती जिंदगी
ऐसे-वैसे, जैसे -तैसे, कैसे कैसे
पुरी किसी की किसी की अधूरी
खत्म होती जिंदगी ।
*nk सनातन