परशुराम बुद्धि-बल का पर्याय
महाज्ञानी ,महातपस्वी भगवान परशुराम जयंती पर विशेष
महासंत ओर महा आयुध विज्ञ-प्रज्ञ ओर महागुरु ओर आततायी चक्रवर्ती सम्राटों का दमन-दलन कर समाज को भय मुक्त कर न्याय के अग्रदूत बन समता सिद्धांत को आरोहित करने वाले–
भगवान
परशुराम
जी की आज अक्षय तृतीया महादिवस पर जयंती जिस पर समस्त ब्राह्मण समाज को एक सूत्रीय बधाईयां ओर शुभकामनाएं…
*भगवान परशुराम का कद पुराणों में कितना उच्च है ये बताने की जरूरत नही… लेकिन बरसो बाद विप्र-द्विज समाज परशुराम जयंती का राजकीय अवकाश घोषित करवाने में सफल रहा केवल इस वजह की सारे 52-54 प्रकार के उप ब्राह्मण एक सूत्र में पहली बार बंधे … इससे पूर्व ये मसला उतर-दक्षिण नहीं मिल सकते जैसा था.. ब्राह्मणों में भी ऊंच-नीच का भेद था कोई ब्राह्मण किसी ब्राह्मण को निम्न मानता था… जबकि सत्य ये है कि सभी ब्राह्मण किसी न किसी सन्त की सन्तति रहे हैं और पुराणों में कोई सन्त किसी सन्त से कम न था और सभी सन्त त्रिकाल ज्ञानी ओर सीधे स्वर्ग ,वैकुंठ, त्रिभुवन, शिवलोक तक पहुँच रखते थे…अतः इतना ज्ञानी होकर भी ब्राह्मण समाज विकेंद्रीकरण का शिकार रहा अफसोसनाक है.. खेर समय बीत चुका है.. महा मनु का वर्ण व्यवस्था जो कर्म प्रधान थी अब जन्म प्रधान हो गयी है अब 100 में बामुश्किल 10 ब्राह्मण 20-30 मंत्र मौखिक बोलते हैं.. शादी ब्याह,यज्ञ-हवन मे पंडित पुस्तक से ही पढ़ते हैं और वो भी 50% अशुद्ध उच्चारण के साथ…
खेर स्वतंत्रता के पश्चात जातिप्रथा या वर्णव्यवस्था क्षीण या गौण हुई है .. इंसमे देश के संविधान वे महान समाज सुधारकों ने अपनी बलवती ओर महत्ती भूमिका अदा की है… आज धोबी कलक्टर बन रहे हैं नाई राजदूत भील अध्यापक.. यानी शिक्षा से मूल जाती ओझल हो रही है.. ओर हिन्दू राष्ट्र के लिए ये आवश्यक है छुत ओर छुआछूत ने जिसमे ब्राह्मण वर्ग का विशेष योगदान रहा हिन्दू जम हुवे बौद्घ जैन इस्लाम ख्रिस्ती पनपे क्योकि इस पंथ ने हमारे द्वारा उपेक्षित निम्न वर्ग को समानता का दर्जा दे गले लगाया.. हमने उन्हें मंदिर से वंचित किया जिससे वो मस्जिद में पहुचे…. खेर लेकिन उन भूलो को सुधारने का अब वक्त है अब हम अपने ब्राह्मणत्व का पूरा पूरा उपयोग करे.. पर रामायण के महाआंख्यान -शबरी के झूठे बेर… की कथा को सर आंखों पे ले और माने की हम भगवान श्री राम से तो बड़े नही..
मनु की वर्णव्यवस्था में ब्राह्मण श्रेष्ठ जाति अतः हम अपना रुतबा ब्राह्मण का छोड़ने को तैयार नही.. बस यही बात हमारे लिए खाज बनि हुई है… जिस ऊंचाई ओर श्रेष्टगत का दम आप; हम ब्राह्मण भरते थे स्मरण रहे देश का संविधान एक निम्न वर्गीय लेकिन एक ज्ञान और कर्म से ब्राह्मण यानी विद्वान के बुद्धि बल से बना आज कई निम्न वर्ग के लोग जो उच्च पदों पर आसीन हैं के उच्च वर्ग को तलवे चाटने पड़ते हैं जी हजूरी करनी पड़ती है खुद आगे चल नमस्कार करना पड़ता है… यानी ये कुंठा कब आएगी जब आप हम ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य समझेंगे अन्यथा नहीं तब जब हम उन्हें हमारा भाई हिन्दू समझेंगे.. लेकिन इसके लिए भगवान श्री राम सा विशाल हृदय चाहिए… भगवान शिव सी महानता चाहिए जिन्होंने श्मशान पर ही धुनि रमायी..
*पहले ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य क्षुद्र में अंतरराष्ट्रीय विवाह होते थे .. ये परम्परा आज फिर शुरु की जा सकती है दुनिया के सबसे प्राचीन हिन्दू धर्म और जाति के संरक्षण में.. लेकिन पचले सब ब्राह्मण एक हो जाय न केवल सिद्धांत में वरन व्यव्हार में.. परशुराम जयंती इस विचार को सम्बल देने के लिए पर्याप्त है..
जय परशुराम
*जय शिवा
+nk सेवक “सनातन’