~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

13 th Democratic Fest !

तेरहवीं भारतीय की मृत्यु संस्कृति शोक से अ-शोक में लौटने का दिन
देश मे 13 वी राष्ट्रीय सरकार के चुनाव के लिए मतदान प्रक्रिया विभिन्न चरणों से गुजर अंतिम पड़ाव की तरफ बढ़ रही है… दोनो प्रमुख पार्टियां जिसमे एक राष्ट्रीय है जो कभी हँसी का पात्र बनी थी जब पूरे देश में इसको मात्र दो सीट मिली थी… यहां तक कि पार्टी का प्रमुख चेहरा भी चुनाव हार गया था…. लेकिन किसी भी वृक्ष या शख्स के वटवृक्ष बनने के पीछे लगभग यही कहानी है… जो राष्ट्रीय पार्टी जो बरसो सत्ता पर काबिज रही जिसे देश को आजाद कराने का भी मोटा श्रेय जाता है 12 वे संसदीय चुनाव में अर्धशतक यानी 50 लोक सभा सीट भी नहीं जीत सकी… जाने क्या …. क्यो हुवा … कैसे हुवा … खुद दल और दल के नेता भी नहीं समझ सके… यकायक पार्टी हासिये पर आ गयी उसके लिए पार्टी थिंक टैंक ने सोचा या नहीं इसका पुख्ता प्रमाण तो नहीं …. लेकिन … सारा भरोसा सिर्फ सत्तापक्ष पर केंद्रित था कि वो उनकी तरह भूल करें और एन्टी इनकम्बेंसी या सत्तापक्ष से नाराजगी का मन्तव्य काम करे और देश की राष्ट्रीय पार्टी के प्रति जनता जर्नादन पुनः विकल्प रूप मौका दे..
.लेकिन सत्ता पक्ष 2014 में प्रचंड बहुमत के साथ अप्रत्याशित रूप से उभरा ओर सरकार बनाई… निश्चित पार्टी का प्रमुख स्रोत संघ परिवार जो वाजपेयी जी के शारीरिक ओर मानसिक रूप से अक्षम होने की स्तिथि में सकते में था और ऐसे में उसने एक राज्यीय या क्षेत्रीय नेता या क्षत्रप के प्रमुख को चुना जिसका राजनीति में प्रवेश एक दुर्घटना से कम न था…. देश की इस पार्टी के पास भी सिर्फ एक ही हथियार था … वो महान विचारक कार्ल मार्क्स की उक्ति की – ” धर्म एक अफीम की गोली है’ को सार्थक करता जिसने पार्टी को 3 से 180 तक पहुँचाया श्री लालकृष्ण आडवाणी जी के रथयात्रा राममंदिर के नाम भावनाओ का ज्वार उठाया और भावनाओं को भुनाया ओर भाजपा सत्तारूढ़ हुवा महान वक्ता,राजनेता के आलोक में जिसने एक नहीं अनेक दलों का महागठबंधन कर इतिहास रचा ओर लोकतंत्र की ताकत और छवि को नया आयाम दिया की इतने छोटे-छोटे दलों से भी राष्ट्रीय सरकार न केवल बनाई जा सकती है वरन चलायी भी जा सकती है सफलतपूर्वक … लेकिन ये करिश्मा… केवल तिलिस्म ओर बेदाग व्यक्तित्व के धनी कवि और सरल-हास्य रस नेता के नेतृत्व में ही सम्भव था…खेर 2014 में हिंदुत्व संघठन से प्रस्तुत देश के विकसित और सजग राज्य गुजरात से मुख्यमंत्री रहे नरेन्द्र दामोदर मोदी जो 15 साल राज्य के सिरमौर रहे और उनके राज्यकाल में गोधरा कांड जो हुवा ओर जो निर्णय हुवे उससे उनकी छवि राष्ट्रीय हिन्दू नेता के रूप में उभरी ओर … संघ का दांव सफल रहा और भाजपा ने अपने बूते पूर्ण बहुमत प्राप्त कर केंद्र सरकार बनाई… ओर संसद में प्रथम प्रवेश पर माथा टेक देश की जनता का दिल जीत लिया कि ये नेता राष्ट्र भक्त हैं और संसद को देश का नियामक मांन पवित्र जगह भी मानता है… हालाकि उन्ही के सुप्रीम नेता ने बतौर प्रधानमंत्री उनको मुख्यमंत्री के रूप में गुजरात मे राष्ट्र धर्म निभाने की बात भी सार्वजनिक रूप से कही थी…. खेर मोदीजी के प्रधानमंत्री बनते ही जैसा कि पार्टी ने उनके नियोजित किया था बतौर प्रधानमंत्री ओर चुनाव सभाओं में वही प्रमुख चेहरा बने और अविश्वसनीय भीड़ उनकी चुनावो सभाओं ओर रैलियों में उमड़ी ओर वही संसदीय दल के नेता बन प्रधानमंत्री मनोनीत हुवे ओर उनके कद्दावर व्यक्तित्व से सारे नेता छद्म या लघु हो गए और सारी सत्ता प्रधानमंत्री के हाथों केंद्रित हो गया… ओर … ओर सत्ता हिंदुत्व के पर्दे के पीछे विकास को आगे लायी… ओर साढ़े चार साल बस यही हुवा… देश स्वच्छ बना और विदेशों में देश की साख बढ़ी… लेकिन अंत मे फिर राष्ट्रीय भावना जो प्रत्येक देश जन की क्मझोरी होती है … को भुनाया गया…. ओर सर्जीकल स्ट्राइक के नाम चुनाव लड़ा गया है … देश हिन्दू बहुल है ….ओर पड़ोसी शत्रु राष्ट्र पाकिस्तान जहां से भारत विरोधी कृत्य-दुष्कृत्य किये जाते हैं … आतंकियों का पनाहगाह है जो ओर अशांति फैलाने में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने में सहयोग देता है…. ओर चुनाव के मुहाने भाजपा को खुद को राष्ट्रीय हित पार्टी के रूप में प्रस्तुत करने का मौका किस्मत से मिला कि पुलवाया आतंकी हमला हुवा 54 अर्धसैनिक जवान शहीद हुवे हालांकि राष्ट्रीय रेकॉर्ड में नहीं… लेकिन … बालकोट पाकिस्तान में आतंकी जेश के ठिकानों पर एयर ओर …. ओर पाक द्वारा कैद एयर मार्शल पायलट को अंतरराष्ट्रीय सन्धि नियमो को छोड़ने को खुद की सरकार की भारी जीत के रूप में प्रस्तुत कर मतदाताओं को अपनी ओर प्रवुत्त किया… इस ओर सत्ता पक्ष पर ये आरोप की उसने अन्य मुद्दे जिसमे सरकार भारी रूप से असफल हुई है जैसे GST ओर नोटबन्दी … से ध्यान हटाने ये कृत्य सरकार की मिली भगत से हुवा वरना जो सवाल मोदीजी ने बतौर विपक्ष नेता पूछे थे कि -सरकार आपकी , सेना आपकी ,सिस्टम आपका, संचार सिस्टम आपका … आतंकी कैसे आते हैं भई… इस पर जवाब मोदीजी को मिल चुका है यदि उनका प्रत्यक्ष या परोक्ष हाथ नहीं है…
खेर मैं पुनः प्रारंभ पर आता हूं जहां मोदीजी ओर उनकी पार्टी का प्रारब्ध टिका है… मोदी फैक्टर या मोदी तिलिस्म कम हुवा है और इस बार वैसा उत्साह नहीं पार्टी में जैसा 2014 में था … क्योकि गुजरात मे मोदीजी वोटरों का चमत्कार देख चुके थे… ओर चार हिंदी प्रदेशों के विधान सभा मे झटके पार्टी के प्रमुख ओर प्रमुखो जो सोचने के लिए विवश करते हैं.. भाजपा जो नैतिकता का दम्भ भरती है सत्ता के लिए किसी भी हद तक जा सकती है … क्योकि कुछ राज्यो में साम, दाम ,दंड ,भेद से सरकार बनाई जिसमे दल के सिपहसालार अमित शाह जी और मरहूम पणिक्कर साब का सियासती शकुनि मामा का चौरस या चौपड़ खेल का आईना साथ रहा.. इस तरह जो नैतिक सोच के मतदाता थे उनका विश्वास कम हुवा पार्टी के नैतिक आचरण को लेकर… क्योकि ऐसा कर इस दल ने भी सियासी कांग्रेस से अलग प्रस्तुत नही किया जिस भरोसे उसने मतदाताओ का मन जीता था…
भाजपा ने हर बार कांगेस से अपनी बराबरी की कि उसने भी ऐसा किया… तो भई आपको इसीलिए सत्तारुढ़ किया था कि आप तो वैसे न थे … फिर आप उस पर आरोप मढ अपनी कमियां छुपाए ये तो मतदाताओं के साथ अन्याय है… सियासत मे जब आप वादे करते हैं तो उन्हें पूरा करना जरूरी है … ओर बेसिर पैर वाले वादे करना जायज नहीं है ये अवाम के साथ धोखे के सम है….
अब अंतिम चरण के बाद दिनांक 23 मई को चुनाव परिणाम व देश का 5 वर्षो के लिए भविष्य तय होगा….
अगर श्रुति तंत्रों पर भरोसा करें तो हवा मोदी पक्ष का रुख बताती है… लेकिन ये राय , ये मतैक्य सिर्फ शिक्षित समाज के अंतःकरण से प्रतीत हो रहा है .. लेकिन ग्राम्य जन जिसमे अधिकतर मतदाता अपढ़ या कमपढ हैं जिन्होंने नोटबन्दी का प्रहार झेला है और खुदरा व्यापारी वर्ग जो जी. एस. टी. से आहत हैं जिससे बिक्री प्रभावित हुई है..
मीडिया द्वारा तथाकथित नाम गप्पू बनाम पप्पू युद्ध प्रायोजित है… ओर मोदीजी को सिर्फ राहुल गाँधी ही चुनौती देते हुवे प्रतीत होते हैं… बाकी महागठबंधन के पास राष्ट्रीय नेतृत्व क्षमता वाला कोई चेहरा नहीं है… कांगेस जो राष्ट्रीय दल है वो मोदीजी से निबटने महागठबंधन के साथ … ये कुछ राज्यो में प्रभावित कर सकता है चुनाव परिणाम… लेकिन कुल मिला कर राजनीति नेहरू.. शास्त्री…. अटलजी के कद की नहीं रही… ये अशालीनता का अखाड़ा बन गयी है .. इंसमे राष्ट्र सेवा कम व्यावसायिक सोच ज्यादा बलवती है…
बस देखना ये है कि देश के मतदाता एक बार फिर मोदी रॉज को आजमाते हैं या बस .. अब ओर नहीं… का रंग दिखाते हैं…
विश्वास की महान भारतीय मतदाताओं ने लोकतंत्र के इस महा पर्व पर पूरे विवेक से राष्ट्र हित मे मतदान किया होगा..!
*nk सेवक “सनातन”