मतवाली आजादी,मतवाले हम !

मतवाली आजादी,मतवाले हम !

अक्षुण्ण आजादी
हम आज़ादी के मस्ताने मस्ति में झूमते परवाने
अक्षुण्ण लोकतंत्र के दीवाने
जूनून ऐ समता गुनगुनाते परवाने ।
जल जाएंगे मर जायेंगे
कर्तव्य पथ से न डिगे न डीग पाएँगे
भगत,आजाद ,राजगुरु सुखदेव की मिसालें
धुन वही जज्बा वही राष्ट्रभक्ति रमायेगे
सुभाष , तिलक ,गांधी नेहरू, टोपे
शास्त्री ईमान राजनीति अलख आदर्श गोखले
सियासत ,शिक्षा को हम व्यवसाय नहीं बनाएंगे
विश्व मानव देश सेवा ही मकसद जय प्रकाश राधाकृष्ण नायक वही अपनाएंगे
शांति के हम प्रेरक,पुजक रक्षक
हिंसा ,प्रति हिंसा नफरत को धिक्कारेंगे
लेकिन जरूरत पड़ी देश की खातिर
तो आन, बान, शान , रीति ,नीति वही याद रखना
शातिर धीर-गंभीर चाणक्य, शौर्य सूचक वीर चन्द्रगुप्त हमारे द्योतक,प्रेरक
अपना रंग वही बासंती
हम भीष्म , अर्जुन ,द्रोण परशुराम बन जाएंगे
रमखाण,तांडव, घमासान हम मचायेंगे
दुश्नम को सबक सिखा यमराज बन जाएंगे
विश्व शांति सौहार्द के हम पर्याय
समुद्रगुप्त , अशोक , हर्ष अकबर दिन ऐ इलाही
सर्वधर्म समभाव सहिष्णुता सौहार्द्र ध्वज-धजा हम लहरायेंगे
भरत, दुष्यंत , कालिदास वाल्मीकि वेदव्यास
हमारे अग्रज आदर्श
श्री राम ,भरत हमारे प्रखर उत्प्रेरक
विश्व गुरु थे हम, रहेंगे, देश -नीति सुगम वही बताएंगे
आर्थिक समृद्धि,भौतिक व्यावसाइकता के हम नही पुजारी
विवेकानंद, दयानंद, रामदास, रसखान, सूरदास , राजा राममोहन
मीर तकी ,अमीर खुसरो ,
कवि प्रदीप, सुर सम्राट बैजू
तानसेन बावरे हम सात सुरी नदियां संगीत
बिस्मिल्लाई तान बजाएंगे
गंगा,जमुना गोदावरी नर्मदा
सिंधु, झेलम ,ब्रह्मपुत्र,ताप्ती, चिनाब ,चंबल
जलधार हरियाली ,नीला अम्बर
फहर फहर तिरंगा फहराएंगे
लहर -लहर गौरव दर्शाएंगे
सिंहनाद रहेंगे, वही रिपु दुश्मन के लिए
दुश्मनों के दुश्मन ,दोस्तों पर जान लुटा जाएंगे
लेकिन एक बार नही 99 बार हो शीशु पाल तुम कृष्ण जनार्दन हम
फिर भी तुम्हे समझाएंगे
गर न माने तुम 99 वी बार तो फिर काल के पर्याय बन चक्र हम चला सबक बड़ा सिखाएंगे
त्रिकाल आशुतोष के हम वंशज
गरल पीना जानते हैं पचाना जानते हैं
लेकिन जरूरत पड़ी तो-2
कालकूट का विषम स्वाद तुम्हे चखाएंगे
इतिहास हम , तुम्हे इतिहास से मिटा डालेंगे
है अगर धन अकूत बिल बेजोस जैसा
दान का सॉफ्टवेयर नही अपनाएंगे
दिया दान उन्होंने किसी संस्था को अरबो में
हम दान नही दे सीधे संस्था बन जाएंगे
करेंगे लाभान्वित कार्य
कल्याणी सीधे प्रत्यक्ष
टाटा -बिड़ला हमारे आदर्श , उद्धमि नही घराने हम उद्धमि जरूरतों को बनाएँगे
उद्यम, उद्योग लगा रोजगार से तर सशक्त उन्हें बनाएंगे
अर्थ- धन से पुख्ता, पुरजोर जन ,समाज हम बनाएंगे ,बसायेंगे
गुलामी हमारा लम्बा इतिहास क्या अब भी हम सबक न ले गलती वही दोहराएंगे
हरगिज़ नही गद्दार वो, पिठ्ठू,चापलूस ,चिरोरी वो
उन गद्दारों को कोस कोस धिक्कारेंगे
विरासत ,वैभव,थाती समृद्धि पूँजी हमारी
काला पन्ना वो हम सर्वम जलाएंगे
परचम वही विश्व गुरु का दंडयायन सरताज हमारे
सिकन्दर को झुकायेंगे
पराजय में भी पौरस स्वाभिमान नृपराज हम वही कहलायेंगे
उस्ताद उसके महान अरस्तू भी हमारे मुरीद बने थे शाश्वत ये संस्कार रचाएंगे
दुनिया रही कभी मुरीद महान भारत
तस्वीर वही बना रचा बसा जाएंगे ।
nk सनातन

Naresh Kumar Sevak “Sanatan”

Poet, writer and English teacher from Udaipur, Rajasthan — M.A. in English & Hindi Literature. Writes kavita, geet, ghazal, bhajan, satire and articles in Hindi, English and Gujarati.

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