“मशहूर होना कौन नहीं चाहता ?! “
मशहूर होना कौन नही चाहता
लेकिन हर कोई तो मशहूर हो नहीं सकता
अब दुनिया मे अनगिनत लोग आए
ओर आज गिनती के दौर में 7 अरब लोग हैं
सब अपना-अपना जीवन जी रहे हैं
ओर बात करें मशहूर लोगो की
तो हर किसी का क्षेत्र जुदा-जुदा है
फिर स्तर की बात करे तो
हां अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय, राज्यइय,
फिर जिलीय, तहसीलीई ,
ग्रामीणिय,
ओर अंतिम स्तर तो मौहल्लास्तरीय आदि ।
लेकिन आज बात करें ख्यात व्यक्तियों की तो
सवाल ये की कितने मशहूर ओर
ओर हैं तो कितने मशहूर हैं
हाँ वैश्विक स्तर पर कुल मिला कर 5000
राष्ट्र स्तर पर दस हज़ार
ओर राज्य स्तर लर 10 हज़ार
जिला स्तर पर 10 हज़ार
तहसील स्तर पर 5000
ओर ग्रामीण स्तर पर 10 हज़ार
मान लो ये आंकड़ा एक बड़े देश का है
जैसे भारत,चीन,अमेरिका, रूस,फ्रांस,जर्मनी ,
ब्राज़ील,अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया,इंग्लैंड
यदि क्षेत्रो की बात करे तो सबसे पहले राजनीति
फिर खेल,फ़िल्म ये अति विशिष्ट क्षेत्र
फिर अंतरिक्ष,मेडिकल, नृत्य, संगीत,गीत,
साहित्य,
लेखन, पेंटिंग,
शिक्षण,सार्वजनिक प्रशासन ,
फिर कृषि ,सामाजिक,आर्थिक, धार्मिक ,पर्यावरणीय, व्यापार,उद्द्योग, स्थापत्य, जंतु जगत, समुद्रीय ,भूगोलीय ,
अभियांत्रिकीय, स्वास्थ्य,मॉडलिंग,
फोटोग्राफी आदि
कुल मिला कर बात करे तो मान लो
हां मान लो छोटे-मोटे एक करोड़
हालांकि इतने नहीँ है आंकड़ा पचास लाख तो क्या 25 लाख भी नहीं छूता
ओर लोग हैं दुनिया में लगभग सात अरब
तो कुल विश्व की आबादी का महज़ एक प्रतिशत
यानी मशहूरो कि संख्या बहुत न्यून है
ओर जो मशहूर नहीँ हैं वो जी रहे हैं अपनी जिंदगी लिए
अब सवाल यही की मशहूर हर कोई होना चाहता है
ओर प्रयास हर कोई करता है
लेकिन सब के नसीब में ये नही होता
बस किस्मत जिस पर बहुत मेहरबान
वही अचानक,अनायास,
यकायक मशहूर होता है
ओर ये जग जाहिर है हर किसी की क़िस्मत चमकदार नहीं होती
अब बात कुख्यात व्यक्तियों की
ओर ये ख्यात का रूप रूप है एक मायने में
ख्यात का तात्पर्य ये की लोग आपको जाने-पहचाने
ये अलग बात है कि अच्छाई या के बुराई
यानी आपको जानते हैं ये काफ़ी है
अब रावण,कंस,हिरण्यकश्यप,यजीदी
हिटलर,मुसोलिनी,नीरो,
गजनवी, गोरि, अल्लाउद्दीन खिलजी,औरंगजेब, मोहम्मद तुगलक
जो अपनी क्रूरता,धोखा, लालच,भूले व्यभिचार, आतंक, पाप ,अमानवता, अनैतिकता,अधार्मिकता ,विद्रोह आदि के लिए
जाने जाते हैं
ओर अच्छाई की महत्ता जानने के लिए
इनकी करतूतों ओर इन्हें जानना जरूरी है ।
आज़कल कुख्यात क्षेत्र आतंकवाद का है हिंसा,क्रूरता ,अतिवाद,
कट्टरवाद धार्मिक-जातीय
जिनके हथकंडे हैं
सद्दाम हुसैन,ओसामा बिन लादेन,अफजल गुरु ,कसाब कुख्यात के पर्याय हैं
यानी नीचौड़ ये चरित्र जाने जायेगे इतिहास में
अच्छाई वाले अच्छाई, बुराई वाले बुराई
ओर हर क्षेत्र में मशहूर होने के क्षेत्र सीमित है
ओर ये एक विडंबना है
कुख्यात को कोई याद करना नहीं चाहता
लेकिन ऐतिहासिक नैतिकता की विवशता है
की अच्छाई को आरोहित करने के लिए
हां बुराई को तुलना कर इंगित करना जरूरी है
की हां बुराई के ऐसे भयंकर ओर बुरे परिणाम होते हैं
जबकि अच्छाई के परिणाम दैविक यानी बहुत अच्छे होते हैं !
*NK सेवक “सनातन”