★श्रीराम -श्रीकृष्ण अभियोजन-अभिप्राय ★
श्रीराम अभिप्राय, श्रीकृष्ण निष्कर्ष ।
श्रीराम एक पूजा, श्रीकृष्ण परिणीति ।
श्रीराम पुराण हैं, श्रीकृष्ण वाचन ।
श्रीराम सिद्धान्त हैं, श्रीकृष्ण क्रियान्वयन ।
श्रीराम रूपक है ,श्रीकृष्ण अलंकार ।
श्रीराम अलंकरण, श्रीकृष्ण अलंकृत ।
श्रीराम प्रेम नभ ,
श्रीकृष्ण महासागर
श्रीराम चिंतक , श्रीकृष्ण मन्थन ।
श्रीराम प्रेम के अटल वीर, श्री कृष्ण प्रेम के परमवीर।
श्रीराम एक संतोष, श्रीकृष्ण एक आक्रोश ।
श्रीराम एक सवाल, श्रीकृष्ण एक हल ।
श्रीराम आध्यात्मिक नभ ,श्रीकृष्ण भौतिक वट
श्रीराम सिर्फ़ एक ओर एक मे पाते हैं, अनुपम विरल शाश्वत प्रेम
श्रीकृष्ण अनेको में रमते हैं लिए सांसारिक अतिरेक ।
श्रीराम रसों की शान, खान ,श्रीकृष्ण धार, मुस्कान ।
श्रीराम आदर्श राजनीतिज्ञ राजा, लिए प्रजा
श्रीकृष्ण विराट राजनीतिज्ञ, कूटनीति
श्रेष्ठ ।
निष्कर्ष दोनो ही- सर्वज्ञ, विशेष-सर्वश्रेष्ठ ।
एक मौन एक मुखर, दोनो ही पूजक-पूजनीय परम् अशेष- विशेष !
*NK सनातन