“महान लेकिन अपंग वैज्ञानिक का अपंग विचार !”
(महान वैज्ञानिक के कथन -“की ईश्वर इस दुनिया मे है कोई साबित कर दे तो वो अपना सब कुछ दे दे।)
जो व्यक्ति 33 जगहों से अंग-भंग है वो ये कहता है कि कोई ये साबित कर दे कि ईश्वर है तो वह अपना सर्वस्व दे दे।
हास्यास्पद है!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
हालांकि उसने अपनी अपंगता के बावजूद अपनी महानता सिद्ध की!
इस चमत्कार से ये साबित होता है कि–
*ईश्वर इस दुनिया मे है!
*ईश्वर इस दुनिया मे नही!!
*÷लेकिन वैज्ञानिक जीनियस ईश्वर है ये सिर्फ़ दिमाग पूछता है
दिल नहो
ओर ये ईश्वर सर्वेशक्तिमान है
इसे महसूस करना होता है
साबित नही
साबित हो गया तो ये रहस्य क्या राह जाएगा
ईश्वर है-वैज्ञानिक तेरी तरह वह महामना साधारण व्यक्ति साबित नही होना चाहता
जो पैदा होता है और अपने स्तर पर प्रयास कर सफल/असफल
अपने आंकलन अनुसार
प्राकृतिक या अप्राकृतिक रूप से मर नही -मार दिया जाता है!!!
अतः ईश्वर है कि बात कहना व साबित करना लघु मानसिकता है
वो असाधारण शक्ति है
तुझमे दम है तो तू साबित कर।
प्राकतिकता को देखने पर किसी पहलू से नही लगता कि इसके पीछे किसी का हाथ नही।
जैसे सांसारिक कृत्य में किसी न किसी व्यक्ति या वस्तु या कारक
का हाथ -दिमाग निश्चित है तो संदेह व्यक्त करने की जगह
आप को यदि शक -शुबा है तो आप साबित करें।
आपने विकलांगता के बावजूद महानता साबित की
गॉड पार्टिकल पर शोध जारी है
आप असफल होते हैं तो निराशा में
ये जरूर कह दे कि कोई साबित करे जायज हैं।
आप इस ब्रह्मांड की शक्ति को साबित करने वाले को सब कुछ देने का ऑफर देते हैं
अफसोस
आपके पास क्या है
एक अपंग शरीर
अरबो की दौलत
एक अदद वैश्विक शोहरत
ओर निश्चित अद्भुत दिमाग लेकिन वही तो ईश्वरीय भाग है जो आपके साथ चला जायेगा
आपने अब तक जो सोचा वहा तक ठीक है
लेकिन आपके नाश के बाद आपके दिमाग की नव सोच तो गयी जो अद्भुत थी और अद्भुत में समा गया।
N K Sevak”सनातन”