मेरी न्यूनताये मेरा सुख-चैन!

मेरी न्यूनताये मेरा सुख-चैन!

*मेरी न्यूनताऐ मेरा सुख-चैन*
मैं कम महत्वकांक्षा वाला शख्स हूँ….
मैं यू तो दुनिया के सबसे अहम
पद
यानी शिक्षक हूँ…
शिक्षक का पद शास्त्रो में अब भी श्रेष्ठ है..
लेकिन हकीकत में इसकी गरिमा क्षीण हुई है…
व्यावसायिकता शिक्षक पर हावी है
गुरू कहि खो गए हैं
ऐसे में शिष्य परम्परा निरापद होती जा रही है…
आजकल अकादमिक शिक्षक,
कोंचिंग शिक्षक
दो प्रकार हो गए है
एक मे सीधी आत्मीयता चरित्र
निर्माण ,नैतिक मूल्यता आदि की ललक रहती है
दूसरे में व्यावसायिकता जुड़ी होती है
जिसमे आशार्थि प्रतिस्पर्धा के लिए पूर्ण रूप से तैयार हो जाय
कोचिंग शिक्षक का
यही जुनून यही लक्ष्य रहता है..
*विद्यार्थी विभिन्न कक्षाओं से गुजरता है और हर कक्षा में अध्यापन कराने वाले शिक्षक से वो प्रभावित रहता है
ओर वो उसके रोल मॉडल होते हैं
लेकिन ज्यो ज्यो वह आगे बढ़ता है पिछले या अनुगामी शिक्षको को भूलता जाता है और वर्तमान शिक्षक उसके चहेते
लेकिन फिर कोचिंग गुरु
मोटिवेशनल गुरु
उसके हीरो बन जाते हैं..
लेकिन जब वह परिपक्व होता है तब आंकलन करता है कि मेरे पूरे शिक्षण काल मे ये मेरे गुरु थे और वो अध्यापक ओर वो शिक्षक
*एक शिक्षक एक कक्षा में कई छात्रों को पढ़ाता है और समान शिक्षा देता है
फिर भी कोई विद्यार्थी 99%
कोई 90
कोई 70 कोई 50
कोई 33
कोई 20
कोई 10 फीसदी
ऐसा क्यों क्योकि कोई पढ़ाई को अति गम्भीरता से लेता है कोई अर्ध गम्भीरता कोई अल्प कोई
अति अल्प कोई नगण्य
इसमे अध्यापक का कोई दोष नही होता ..
द्रोणाचार्य कृपाचार्य ने 100 कौरव ओर पांच पांडवो को समान शिक्षण दिया लेकिन
अर्जुन सिर्फ एक ही होते हैं..
*खेर मैं जो लिखना चाह रहा हु
वो ये की –
मैं एक साधारण शक़्स
एक साधारण ओहदा
या आजीविका
मेरी जरूरते कम
मेरी आकांक्षाये शून्य
ओर मैं अपने से पीछे वालो को देख खुश हूँ
लेकिन मेरे साथ वाले मेरे आगे वालो को मेरे पीछे देखने की आदत है
की मैं उनसे पीछे हूँ …
लेकिन मैं उनकी सोच की परवाह नही करता
अपने हाल में मस्त रहना
मेरा शगल है….
मैंने अपने स्तर पर कई प्रयास किये और सफल भी रहा लेकिन कुछ क्षेत्रों में कूदा दुनिया से आगे
निकलने लेकिन…
चारो खाने चीत…जो पाया एक ही पल में धूलधूसरित …ओर …
एक पल तो बर्बादी के कगार पर..
पारिवारिक रूप से अचानक समीकरण बदले
क्यो…. क्योकि……
मेरे अग्रज जो परिवार के मुखिया थे ….का देवलोकगमन हो गया…
अब चारो तरफ बिखराव अलगांव टूटन बिसरन ….
इधर शुरू से ही मेरे व्यावसायिक आकाओ ने
जाने किस बात की पूरी दुश्मनी निभाई
ओर आर्थिक और व्यावसायिक रुप से समृद्ध न हो सका
लेकिन हमेशा मैं वर्तमान में ही रहता हूँ
जो बीत गया सो बित गया…
ओर ये दर्शन रामायण का–
होइ है वही जो राम रची रखा…
क्यो करि तरस दिखावे साखा..
अंत मे मैं मशहूर बॉलीवुड स्टार सुनील दत्त साब के मुख से निकला संवाद दोहरा अपनी बात को विराम दूंगा-
मुझे गम बर्बादी का नही..
गम बर्बादी का मेरा क्यों है
चर्चा हुवा ..!!!!!!!??
*NK सेवक ” सनातन”

Naresh Kumar Sevak “Sanatan”

Poet, writer and English teacher from Udaipur, Rajasthan — M.A. in English & Hindi Literature. Writes kavita, geet, ghazal, bhajan, satire and articles in Hindi, English and Gujarati.

Leave a Comment

Keep reading

You may also like

दिल दिवाली दिव्य प्यारी Hindi

दिल दिवाली दिव्य प्यारी

दीपावली गीतम ये दिल दिवाली है~2 मन मतवाली न्यारी प्यारी दुलारी त्योहारी की रानी है ये दिल….. दिलहारी रंगोंलिया सजाती उजियारी खुशहाल…

October 21, 2022 Read →
ब्लू व्हेल जाल में ! Hindi

ब्लू व्हेल जाल में !

★ड्रग्स की बड़ी सौगात★ 【 आज शाहरुख खान मशहूर खान का बेटा आर्यन ड्रग्स मामले में पुलिस ने धर दबोचा है 】…

October 4, 2021 Read →