मैं कहाँ जाऊँ होता नहीं फैसला…×× !!??

मैं कहाँ जाऊँ होता नहीं फैसला…×× !!??

★ ग़ज़ल अपनी विधा की : मैं कहाँ जाऊ पर मेरा अपना नशा ! ★
मैं कहाँ जाऊ होता -3 हां होता नहीं क्यों फैसला
एक तरफ मैखाना है
ओर एक तरफ उसका घर
यानी घर दिले दिलरुबा गुलफ़ाम है
ऐसे दिलकश दिलनशी हालात में -2
किधर जाऊँ का ख्याल फिज़ूल है
क्यो क्योकि कब गुलफ़ाम है तो
तो मैकदे मैखाने ओर जाम की कहां जरूरत है
ओर एक बार में दो तरफ का कोई ख्याल ही नही
सनातन कोई सवाल ही नहीं
क्यो क्योकि
जब गुलफ़ाम है तो वादा ओ जाम क्यो
क्योकी बस चारो तरफ जन्नत ही जन्नत प्यार ही प्यार है
मन प्यार की चाशनी से तर है
ऐसे में मैखाने जाने की क्या वजह है
जो मन यूँ ही नशेमन ओर दिल रंग ऐ मोहब्बत से गुलज़ार है !
हिन्दुस्तान में महिलाएं शराबनोशी नही होती*
हां मिनाजी जी की बात ओर है
गुजरे कल की वो किवदंती जो एक अपवाद है
जब दिलरुबा है आगोश ऐ आब ओ हवा में
समा रंगीन है मोहब्बत ऐ बागों बहार में
मैखाने का भला तब कहाँ मकाम है
दिलरुबा की बाहे ही मैखाना
उसके दिलकश अंगूरी जाम
ओर आंखे नशा ही नशा जहां अंगूर की बेटी की क्या बिसात है
न कोई नाप न कोई पैमाना
छलकती मोहब्बत ओर दो दिल का तराना
न कोई दाम ना कोई जिस्मानी नुकसान
बस अमृत ही अमृत
जन्नत ही जन्नत
ओर हर पल, हर घड़ी खुशगवार
इसलिए खालिस शेर है ग़ज़ल है उस ग़ज़लकार की
की मैं कहाँ जाऊ होता नहीं फैसला
एक तरफ इसका घर एक तरफ मैकदा
प्यार मोहब्बत की चाशनी में डूबे दिलबर को
मैकदे जाने की कहा जरूरत
हां गर दिलरुबा बेवफ़ा हो गयी है तो बात ओर है
ओर ये सवाल वाजिब है
फलसफा तो ये है बेवफाई पर प्रेमी मैखाना ढूंढते हैं
मोहब्बत में सराबोर प्रेमी मोहब्बत के नशे में डूबते है
*भाग 2 **
अगर दिलरुबा बेवफा हो जाय तो मर्दन लोग
मैकदा ढूंढते हैं
लेकिन गर प्रेमी बेवफा हो जाय तो
प्रेमिकाये मैखाना कहा ढूंढती है
मिसाल ऐ मोहब्बत वो दूसरी दुनिया बसा के
पहले प्रेमी को मन ही मन याद करती है
ओर चाहे प्रेमी हुवा बर्बाद वह पति का घर आबाद करती है
समझौता ही सही शौहर का घर ही उसका मैकदा
पति का प्यार ही उसका नशा
बाल परिवार उसका जाम
शायद ये इसलिए कि पुरुष प्रधान समाज का चलन
हिन्दुस्ताम में औरत को देवी की हैसियत
ओर इज्जत ही उसकी दोलत
आबरू शर्मोहया नज़ाकत उसका जेवर
इसलिए बस इसलिए महिलाओं को सरे बाजार शराब पीने का नहीं रिवाज़
मर्यादा के दामन में बंधी आर्यावर्त की औरत
घर परिवार ही उसका मैखाना
सांसारिक जीवन मे ही डूबना उसका नशा
बॉलीवुड की मिनाजी शराब में डूबी थी
गम,तन्हाई,निसंतान,
बेमुरव्वत मोहब्बत ओर असल प्रेमी की तलाश
ओर मीना जी डूब गई
सब पहलू लेकर
शराब में निराश हताश
वो शायरा बन गयी
पत्थरो में प्यार ढूंढती थी
ये खुलासा वो अपने अजीज
संवाद अदायगी के बादशाह अपने घर दो पल हम बाटने करती है
तब जब राजकुमार
साब उनसे उन पत्थर कलेक्शन का राज पूछती है
वो बताती है ये देखो इस पत्थर का हुलिया
ये रो रहा है, ये हँस रहा है
ये शिक़वा -गीला लिए हुवे है
ये खुशगवार है फ़ला फ़ला
तन्हाई पत्थरो में भी साथ ओर साज ढूंढती है !!!!

*nk सनातन

Naresh Kumar Sevak “Sanatan”

Poet, writer and English teacher from Udaipur, Rajasthan — M.A. in English & Hindi Literature. Writes kavita, geet, ghazal, bhajan, satire and articles in Hindi, English and Gujarati.

Leave a Comment

Keep reading

You may also like