खेल सब हवा का है!

खेल सब हवा का है!

◆ पतंगे वही उड़ रही हैं हवा जिनके साथ है ! ◆

पतंग आसमा में उड़ाने के लिए हवा का वातावरण में होना जरूरी है
ओर उड़ जाय तो वातावरण में हवा की उपस्थिति ज़रूरी है !
पतंगबाज कितना ही माहिर ओर शातिर हो
पतंग तब तक ही आसमा में रहती है जब तक हवाओं का साथ मिलता रहता है ! ओर पतंग उड़ाने वाला कितना ही जोर ,दाव-पेच लगा ले बिना हवा के पतंग आसमान की सैर कर ही नहीं सकती ।
इसलिए सांसारिक जीवन दर्शन में भी वही शख़्स उड़ रहे हैं जिनके साथ हवाओं का रुख यानी भाग्य बलवान है। सांसारिक -भौतिक जीवन में मेहनत सब करते हैं, प्रयास भी सभी शिद्दत से करते हैं लेकिन एक अनार सो बीमार की फ़िज़ा में दौड़ से बाहर हो जाते हैं क्योंकी क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी में एक दल में सिर्फ़ ग्यारह खिलाड़ी ही हो सकते हैं !
अब देखे भाग्य की बात एक व्यक्ति राजकीय नॉकरी में है और अचानक दुर्घटना या हार्ट अटैक से मर गया तो उसके सबसे बड़ी सन्तान को नोकरी मिल जाती है बिना प्रतिस्पर्धा के ओर बिना परिश्रम के वो नोकरी पा जाता है जिसके लिए हजारों नवयुवक तरस रहे हैं यानी मृत कर्मचारी कोटा के अंतर्गत। ठीक यूँ ही सैनिक के पुत्र-पुत्री को भी लाभ मिलता है क्योंकि उसके पिता देश की सेवा में है। फिर देखे कोई दुर्घटना में मर जाता है हालांकि वो तो मर जाता है लेकिन परिवार या घर वालो को जिंदा कर जाता है। अब देखे लखीमपुर खीरी,उत्तरप्रदेश में किसान रैली ओर दंगल आयोजन में हिट एंड रन में 7 लोग मारे गए जो सब साधारण आर्थिक स्तिथि के थे। अब मर गए वापस तो ला नहीं सकते और कोई चारा नहीं। सरकार 45 लाख रुपये देती है हर मृतक को । अब उस बेचारे ने कभी 45 हज़ार रुपये नहीं देखे एक बार 45 लाख कमा के दे जाता है और उसके पीछे अन्य लाभ भी जैसे मृतक के पुत्र-पुत्री को नोकरी। यानी दुर्भाग्य सौभाग्य में यदि आर्थिक स्तिथि की बात करे। और कहावत सही साबित होती है -”बॉप बड़ा न भैया सबसे बड़ा रुपिया”! ओर यही कारण है कि बॉप के मरने पर पैतृक संपत्ति पर विवाद होते हैं। मृतक भाई,बहन ,पिता-माता यदि मर जाए तो उसके बदन पर सोने-चांदी के जेवर उतार लिए जाते हैं कोई नहीं भूलता ! यानी इस दुनिया मे धन की भूमिका सबसे अहम है।
धन सब जख्मों को तुरन्त नहीं तो शने-शने भर ही देता है ! धन सारे अवगुण छुपा ही नहीं देता बल्कि उन्हें गुणों में परिवर्तित कर देता है। इस तरह धन इस संसार का मानव जाति के लिए अघोषित ईश्वर है इस तथ्य से कोई दोराय नहीं हालांकि कुछ लोग कहते हैं धन बहुत कुछ है लेकिन सब कुछ नहीं !
*NK सेवक “सनातन”
■ कड़वा सच: इलाज़ में धन खर्च से खुशी नहीं होती ! ■
सारे कामो में धन व्यय करते हैं तो कोई दुःख नहीं होता वरन खुशी होती है लेकिन जब हम किसी बीमारी में ठीक होने या इलाज हेतु धन खर्च करते हैं तो दुःख होता है कि इस कारण धन व्यय हुवा लेकिन हाँ यदि ठीक हो जाय तब खुशी नहीं लेकिन संतोष अवश्य मिलता है की चलो धन व्यर्थ नहीं गया !
*nk सनातन

Naresh Kumar Sevak “Sanatan”

Poet, writer and English teacher from Udaipur, Rajasthan — M.A. in English & Hindi Literature. Writes kavita, geet, ghazal, bhajan, satire and articles in Hindi, English and Gujarati.

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