~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

रिटायरमेंट एक पड़ाव!!!!!

अभी अलविदा न कहो दोस्तो
( अभी अलविदा मत कहो दोस्तो अलविदा तो अंत है और अंत किसने देखा और यही फलसफा जिंदगी को बिंदास ओर रोमांचक बनाता है…. हमारे मित्र महेंद्र जी शर्मा (प्राचार्य फतेह राजकीय सीनियर सेकंडरी स्कूल ,उदयपुर ,राजस्थान इंडिया की सेवा नृवित्ति पर कुछ विचार मैंने ढाले ओर उड़ेले हैं एक कवित्त रंग में जो मैं … कविता कुछ इस तरह है….)

सेवा निवृत्ति क्या है सेकड़ो आवृत्तियों का सैलाब।
हज़ारों कड़वी मिठी यादो की अनुगूंज बेहिसाब ।।
सेवा निवृत्ति क्या है एक पारी का अंत दूसरी का आरंभ ।
ओर नकली या दोहरी जिंदगी से असल जिंदगी का शुभारंभ ।।

ओर आगे कहे तो जिम्मेदारीयां राजकीय, शासकीय, कर्मीय से निजात-छुटकारा
जिसमे न संडे न किसी छुट्टी का इंतज़ार बस राहत का चटकारा

ओर आगे कहूँ तो रुतबा पद का पश्च होना और जो कमाया सेवा काल मे अब दिखना
उसको भुनाना, उसके मेले लगाना ओर खुशीयां बाटना
अब तक जिये अपनो के लिए, दूजो के लिए
मगर अब जो जीना हैं सिर्फ़ अपने लिए जीना
वरना दुनिया मे आने का रहेगा गीला-शिकवा

पद कोई भी हो कुछ सीमाएं गरिमाये कुछ विवशताएं होती है
ओर घोड़ा घास से दोस्ती न करे जिम्मेदारीयां कहती हैं
प्रशासकीय मजबूरियां होती हैं परिसर में
परिसर से बाहर भी अमा यार कहा छूटती हैं
हर कर्मी ,सेवा कर्मी ,प्रशासक को भी नियम कर्तव्यों में बंधना होता है
ओर काम बोलता है ,नाम बोलता है
ओर अवार्डों ,पुरुस्कारों ,सम्मानों का उसपे वारना होता है

पहले वक्त के पीछे भागना होता था
अब वक्त को अपने पीछे भागना है
ओर यही बात जीवन को रंगीन बनाने के लिए काफी है
हालांकि आप महकमे में रह कर भी अपनी शर्तों अपनी मौज जिते है
आप नहीं बदलते हैं बस पारी बदलती है
ओर टेस्ट क्रिकेट की कहे तो जिंदगी दो पारी की है
वन डे या एक दिवसीय या T-20 नहीं
वाकई टेस्ट मैच है दो पारी का ओर दूसरी पारी ही टेस्ट क्रिकेट ने निर्णायक होती हैं

अब आध्यात्म, समाज सेवा ,साहित्य सेवा ,पर्यावरण ही साज हो आवाज़ हो
ओर फुर्सत के पल रूटीन में हो
जिसमे सुने गीत महान मुकेश रफी किशोर लता जी मन्नाडे रफी साब के ओर मन की जय हो

ओर और भी जो रुचि करे, करे और बिंदास जिये
बस यही तारतम्यता हो जीवन के इस सूर्यास्त पर
रात हो अपनी हो और चेन भरी सांसे हो
ओर सुबह सुकून भरी ओर ओर भक्तिमय हो

दोस्तो याद रखना तुम भी ओर आप भी
रिटायरमेंट सबका भी होगा एक न एक दिन कभी ना कभी
समझौता किया बहुत अब तक अब और न हो
ओर जो कमाया उसके ब्याज में ही जिंदगी बसर हो
ओर मूल दिखे उस अंतिम महा पडावी यात्रा में
की अपने अपनो को भी शोक में भी फक्र हो ।
*nk सेवक “सनातन”