लता (ताल सुरा सुंदरी साम्राज्ञी)

लता (ताल सुरा सुंदरी साम्राज्ञी)

बसंत राग में लीन कोकिल कंठी बुलबुल कोयल बीन
स्वर सजनी माँ शारदा की वृहदहस्त
गीत गाने में ताल का उल्टा लता सिद्धहस्त ।
सात सुर सनही 14 सुर जिसके कोकिल कंठ
सुनते ही रुक जाए कदम श्रोता हो मुग्ध मंत्र ।
यूं तो स्वर-ध्वनि-आवाज़ अजर अमर
ब्रहांड या के वातावरण में घुली जैसे गुंजन भंवर ।
लेकिन आधुनिक युग की देन ग्रामोफोन की अलख
अब हर स्वर यंत्र में मग्न ले मंत्र विरल पलक ।
पार्श्वगायन, संवाद,भाषण ,प्रवचन गीत संगीत
समाहित या के टेप जब चाहे हो रसमय मीत ।
लता जी,आशा जी, मुकेश जी ,रफी साब, किशोर दा,मन्नाडे दा,हेमंत दा,महेंद्र कपूर साब
शमशाद,सुरैया,गीताबालीनूरजहां सब स्वर लहरी
मन मीत
जो जिये मरे मधुर गीत संगीत
स्वर मलिका तरन्नुम अलाप की पर्याय
भारत रत्न बेशुमार प्रशंसकों की धड़कन
मां धवला सुता पंच भूतों में विलीन
हे ईश्वर हम बड़े भागवान क्योंकि
अद्यतन युग की तकनीकी जो स्वर्ग सीखे के समीप
हम उपभोग के कामी रहे बड़भागी
की नही बिनाका -चित्रहार को तरसे करे इंतजार
जब भी मन किया मोबाईल बटन दबाया की मस्ती मृदुता में डूबना स्वर संगना
लता जी मंगेशकर इक अमर थाती
देश की स्वर विरासत विरल धात्री
नमन वंदन चंदन हे भारती
तेरे नाम मे सुकु लता कहो या ताल
बस मन हर्षाती हर तन भाती !
इक बस लता महारानी
स्वर साम्राज्ञी
nk सनातन

Naresh Kumar Sevak “Sanatan”

Poet, writer and English teacher from Udaipur, Rajasthan — M.A. in English & Hindi Literature. Writes kavita, geet, ghazal, bhajan, satire and articles in Hindi, English and Gujarati.

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