“हार्दिक श्रद्धांजलि कविता”
(पुण्यात्मा स्व. मणिकांत जी को आदरांजलि दिनांक 19 दिसम्बर,2021)
खाकी थे यानी कानून की लाठी थे
लेकिन काव्य हाला के साकी थे।
वर्दी के सच्चे प्रहरी
इमा जिनकी पूँजी कानून के साथी थे ।।
एक ऐसे महकमे के राज कर्मी जो भ्रस्टाचार का पर्याय है
कानून से परे राठौड़ी कार्यवाही जिसका फंडा है
में रहकर भी क्या पाक-साफ़ गुजरे
इमा की ये मूरत सिपाही वो सच्चे
असूलों से कभी न समझौता किये
ओर कर्तव्यों से कभी न डिगे।
क्रूर ,निर्मम,धौस वाले विभाग के होकर भी
वो एक अपवाद थे
सिस्टम के प्रति विद्रोह,नाराजगी
उनकी कविताओं के अंदाज थे
हास्य झलकता नही फुटता था उनकी बातों में
कविताएं प्रखर होती थी जैसे महा कवि दुष्यंत की पैनी धार में
देश के सिस्टम में हो बदलाव उनकी धुन थी
काले कानूनों श्याह विषैली सियासत से उन्हें गिन थी
पुलिस जैसे विभाग से गुज़र कर भी
हास्य विधा को जिसने
अपनाना
व्यंग्य के चुभते पुट से सबको खूब हंसाया
हास्य की उस जिन्दादिल शख्सियत को नमन
जो अब धरती नही स्वर्ग में हैं
अपनी जिंदादिली चुगताई लोट पोट कविताओं से
ऊपरवाला जो दुनिया के इतने तनाव पालता है
बिठा के पास थोड़ा जरूर हसता होगा।
एक ओर उनके व्यक्तित्व की खासियत
क्या खूब रंगीन मिजाज घुलनशील
मखमली दिलकश आवाज़ ओर सुर के धनी
बॉलीवुड गीत ऐसे गाये लय-तान-धुन में बह की रफी-किशोर-मुकेश साब भी कहे वाह
यादे ही हैं अब हमारी तुम्हारी पूजी
पुण्यात्मा जो रहेंगी काव्यांगन का सम्बल
कोई तोड़ नही इस दुनिया के इस क्रूर दस्तुर का
लेकिन आप ऐसे गए अनायास खुद हंस कर हँसा कर
लेकिन दिल के आंसू रुलाकर
आसमाँ से भी हम पर वो ही दुलार रखना
ईश्वर को एक दो रंगीन चटपटे चुटलके सुना कर
वो ही खुमार रखना
हा हम सब पे वो ही प्यार यार रखना
हुतात्मा को वंदन,चंदन ,नमन
जय हिंद
*nk सनातन