●क्रूरता●
क्रूरता को प्राकुतिक रूप से परिभाषित करना मुश्किल है लेकिन हां मानवीय दर्शन और मनोवृत्ति के हिसाब से इसे परिभाषित करना सरल ओर सहज है कि –” किसी निरीह व्यक्ति,प्राणी ,जानवर को नृशंस्तापूर्वक यानी बिना किसी दया भाव या मानवीयता दिखाए किसी के साथ आचरण करना ,हत्या करना ।
प्राकुतिकता की बात करे तो मानव अक्सर पशुवत व्यवहार की बात करता है । पशुता क्रूरता नहीं होती इसका तात्पर्य जड़ता या असभ्यता या ढीठता से है। पशुओं में दो प्रकार के पशु ओर पक्षी ओर प्राणी आते हैं – एक शाकाहारी ,दूसरा मांसाहारी। अब मनुष्य सबको चरितार्थ करता शब्द पशुवत कहता है लेकिन यहां मूलरूप से हिंसक जानवरोँ की तरफ ही उसका भाव है। पशुता का सीधा अर्थ अपढ़,असभ्य,जाहिल,
गवार,जंगली,मूढ़ ओर मूढ़ता आदि से है। अब जो जानवर हिंसक हैं जन्म से ही प्रकुति के हिसाब से जो पेटपालन के लिए सिर्फ पेट पालन के लिए अपने से कमज़ोर प्राणियों का शिकार करते हैं सनद रहे या स्मरण रहे कि कोई भी जंगली जानवर शौक से शिकार नहीँ करता ओर न ही कोई जंतु अपनी ताकत और बल का दिखावा करता है और उसका प्रयोग अकारण किसी निरीह प्राणी पर करता है। तो ऐसे में किसे क्रूर कहा जाय…? इस दृष्टिकोण से तो कोई भी पशु-पक्षी या प्राणी क्रूर ,निर्मम नहीँ कहा जा सकता । तो फिर क्रूरता की परिभाषा क्या ओर धरती ग्रह पर क्रूर कौन ?
वैसे लुसका,जाम्बिया के एक अभ्यारण या चिड़ियाघर में एक बड़ा सा पिंजरा है उस पिंजरे पर एक साइन बोर्ड लगा हुवा है जिस पर अंकित है, ” दुनिया का सबसे खतरनाक प्राणी” ! ओर पिंजरा खाली है लेकिन उसमें एक बहुत बड़ा आईना लगा है बीच पिंजरे में जिसके ऊपर लिखा है कि आप इस काँच में दुनिया का सबसे खतरनाक जानवर देख रहे हैं! ओर जाहिर है कांच में व्यक्ति अपना अक्स देखता है और वही इस दुनिया का सबसे खतरनाक प्राणी है !
ये उक्ति दर्शाती है कि निस्संदेह धरती का आदमी दुनिया का सबसे खूंखार प्राणी है जिसने अपनी बुद्धि-बल और तकनीकी से बड़े -बड़े ओर खूंखार से खूंखार ओर विशालकाय जानवरों को महज खिलौना बना दिया है!
1963 में अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के ग्रेट एप्स हाउस में एक प्रदर्शनी लगी थी वहां एक तख्ती वाला फोटोग्राफ़ था जिस पर उकेरा हुवा था उस उक्ति को की-दुनिया का सबसे खतरनाक प्राणी, फोटोग्राफ में एक दर्पण है और सामने एक आदमी और उस आईने में उस आदमी की तस्वीर दिख रही है….!!!
यानी आदिकाल से ही आदमी खानाबदोश होकर जानवरों का शिकार कर पेट भरता रहा । फिर शने-शने बुद्धि और सभ्यता का विकास हुवा ओर मनुष्य तकनीक युग मे कदम रख अत्याधुनिक बन गया। चांद पर पहुंचा,मंगल पर भी यान भेजे…। ओर मेडिकल साइंस में दैविक तरक्की कर ईश्वरत्व को चुनोती देने वाली भौतिकप्रकुति तैयार की ओर असाध्य रोगों पर वैसे ही भयावह जंगली ओर जहरीले जानवरो को काबू कर खिलौना बना दिया। और चीन जैसे राष्ट्र में कई प्रकार के जानवरों को निर्ममता से पका कर खाया जाता है। मनुष्य शाकाहार की प्रचुर उपलब्धता ओर सभ्यता हाँसिल करने के बावजूद मानवीय मूल्य ताक पर रख कर निरामिष या मांसाहारी बना हुवा है यानीआदि पन जंगलीपन मानव के डीएनए में हैं और मानवीय मूल्य सिर्फ उसकी जिंदगी के मायने हैं दुसरो की जिंदगी उसके लिए एक मच्छर के बराबर है।
यानी स्पष्ट है मानुष ही संसार का सबसे विषम ओर हर दृष्टि से खतरनाक प्राणी है!
*nk सनातन